पश्चिम बंगाल में टीएमसी का ब्रेकडाउन शुरू… सत्ता बदलते ही क्यों एक-एक कर ममता से दूर हो रहें उनके सिपाही?

Mamta Banerjee TMC Break : जब किसी राज्य में सत्ता पलट होता है तो केवल कुर्सी नहीं बदलती बल्कि राज्य स्तरीय पार्टियों के साथ-साथ क्षेत्रिय स्तर की राजनीतिक पार्टियों के भीतर भी बड़ बदलाव देखने को मिलता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी है। यूपी में जब 2012 में विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने मायावती प्रमुख को बड़े अंतर से हराया था, तो बसपा के भीतर फूट पड़ गई थी। पार्टी के नेता अलग-थलग राह पकड़ ली थी। अंत में बसपा चीफ मायावती अपनी ही पार्टी के आंतरिक विद्रोह से काफी कमजोर पड़ गई। अब यही हालात पश्चिम बंगाल की राजनीति में देखने को मिल रहे हैं।
बंगाल में लंबे समय से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता पर काबिज थी, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुत्व की पॉलिटिक्स कर टीएमसी को बड़ी पटकनी दे दी और राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बन गई। मगर पश्चिम बंगाल की राजनीति की उठा-पटक यहीं नही रुकती, सत्ता पलट होने के ठीक बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई। टीएमसी के जिन सिपाहियों के भरोसे ममता बनर्जी ने चुनाव की कमान संभाली अब पार्टी के उन्हीं नेताओं ने टीएमसी का साथ छोड़ दूरी बनाना शुरू कर दिया है। इनता ही नहीं, पार्टी के कई नेताओं ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार और ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं; और पार्टी में बगावत की ये आंतरिक कलह महज चुनाव के बाद ही शुरू हो गई।
बंगाल में सत्ता पलटते ही टूटने लगी टीएमसी
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी में फूट पड़ गई है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के बाद ही पार्ट के कई नेताओं ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर दी है। कई नेताओं ने तो चुनाव के दौरान ही टीएमसी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। वहीं अब अन्य टीएमसी नेताओं ने भी पार्टी के पदों से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने की तैयारी में जुटे हैं। टीएमसी नेता अभिजीत मजूमदार, काकोली घोष और बाबुल सुप्रीयो जैसे वरिष्ठ नेताओं ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाकर पार्टी से किनारा कर लिया है। महिला विंग अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के बाद कोकिला घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी ही पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी पर महिला सांसदों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया। साथ ही ममता बनर्जी को भी पार्टी में सुधार करने के लिए विशेष सलाह दे डाली। उधर, टीएमसी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने टीएमसी की रणनीतियों पर कई गंभीर आरोप लगाए। सोमवार को टीएमसी के 58 नेताओं ने पार्टी से बगावत करने का एलान किया और अलग पार्टी बनाने का भी फैसला किया है। इन बागी टीएमसी नेताओं ने ममता बनर्जी की पार्टी को तोड़कर खुद की पार्टी बनाने का दावा किया है और ऋतुब्रत बनर्जी को नेतृत्व सौंपने का भी एलान किया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी की टीएमसी को नकली और ऋतुब्रत बनर्जी की टीएमसी को असली पार्टी बताया। जिसके बाद असली-नकली के बीच ममता बनर्जी की पार्टी पूरी तरह से टूट गई है।
2026 में टीएमसी से कितने नेता अलग हुए?
इस साल विधानसभा चुनाव-2026 के परिणाम घोषित होने के बाद से ही ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी के नेताओं ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। चुनाव के पहले ही अग्निमित्रा पॉल, शांतनु सेन, अभिजीत मजूमदार ने टीएमसी से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर लिया था। भाजपा ने भी सत्ता में आने के बाद अग्निमित्रा पॉल को कैबिनेट में जगह दे दी। वहीं, टीएमसी के चुनाव हारने के बाद बाबुल सुप्रियो ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बाबुल सुप्रीयो पहले भाजपा में केंद्रीय मंत्री थे, लेकिन 2021 में उन्होंने TMC ज्वाइन की थी और अब फिर से उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वहीं संतानु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। कुछ स्थानीय और नगर निकाय नेताओं ने भी पद छोड़े हैं तो कुछ सांसद और विधायकों ने संगठनात्मक पद छोड़े हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है। पार्टी में महिला विंग अध्यक्ष व सांसद कोकिला घोष ने भी टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है। अब करीब 60 नेताओं ने पार्टी से बगावत करने का दावा कर दिया है।
गुरुवार को बंगाल में टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के खिलाफ देशद्रोह की शिकायत दर्ज हुई है, जिसके बाद ममता बनर्जी को गिरफ्तार करने की मांग तेज हो गई है। ये FIR ममता बनर्जी द्वारा एक भड़काऊ भाषण देने के आरोप में शिकायतकर्ता वकील रिंकी सिंह चटर्जी ने सिलिगुड़ी साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह ममता बनर्जी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग के लिए 8 जून को कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगी। उधर, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर जानलेवा हमले को लेकर पहले पार्टी विवादों में घिरी हुई है। ऐसे में ममता बनर्जी के ऊपर चौतरफा मुश्किलें आ खड़ी हुई हैं।
क्यों टीएमसी छोड़ रहें पार्टी के नेता
टीएमसी में फूट और पार्टी के नेताओं का ममता बनर्जी के खिलाफ जाने को एक राजनीतिक घटना माना जा सकता है। बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ताबड़तोड़ कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टीएमसी के कई नेताओं के ठिकानों पर रेड की है। जिनमें शिक्षक भर्ती घोटाले से लेकर राशन घोटाला शामिल है। ईडी की लिस्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का नाम भी शामिल है, साथ ही बंगाल के पूर्व अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस, पूर्व टीएमसी विधायक तापस रॉय, राशन वितरण घोटले में लंबित टीएमसी नेता शाहजहां शेख और नॉर्थ दमदम नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन सुबोध चक्रवर्ती भी ईडी के घेरे में हैं। यह कहा जा सकता है शुभेंदु सरकार के निर्देशों के अनुसार ईडी लगातार भ्रष्टाचार व दुष्कर्म मामले से जड़े टीएमसी नेताओं पर कार्रवाई कर रही है। इस कारण पार्टी के अंदर कलह मची हुई है और नेता टीएमसी छोड़ कर अन्य पार्टी की और चुनावी राह तलाश रहे हैं।
कारण चाहे जो हो, मगर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का पतन होता साफ दिख रहा है। पार्टी के अंदर पड़ी फूट अगर ममता बनर्जी सुलझा नहीं पाई तो उनका सालों की राजनीतिक मेहनत बर्बाद हो जाएगी। ममता बनर्जी के सामने इस समय दो प्रमुख चुनौतियां हैं- पहली कि वह पार्टी के अंदर उमड़ रही कलह को शांत कर बगावत को रोकें और दूसरी ये कि पार्टी पर लग रहें आरोपों पर सार्वजनिक तौर पर जवाब दें जिससे पार्टी स्थिर रहे।



