जल संकट का अंतिम समाधान
भारतीय वैज्ञानिकों का चमत्कार, हवा से 20 लीटर शुद्ध पेयजल बनाने वाला 'सोलर-हाइड्रो' पैनल किया लॉन्च

लगातार गहराते वैश्विक जल संकट और भूजल के गिरते स्तर के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अभूतपूर्व आविष्कार किया है, जो पूरी दुनिया की प्यास बुझाने का दम रखता है। शोधकर्ताओं ने एक ‘सोलर-हाइड्रो’ (Solar-Hydro) पैनल विकसित किया है, जो वातावरण की हवा से सीधे नमी खींचकर प्रतिदिन 20 लीटर तक शुद्ध और मीठा पीने योग्य पानी बना सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह उपकरण बिना बिजली के, केवल सूर्य की रोशनी से काम करता है और राजस्थान जैसे सूखे रेगिस्तानी इलाकों में भी पूरी तरह कारगर है।
पानी जीवन का आधार है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध दोहन के कारण आज दुनिया के कई हिस्से भयंकर सूखे (Drought) की चपेट में हैं। भारत के कई ग्रामीण और रेगिस्तानी इलाकों में महिलाओं को पीने के पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है। इसी गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने ‘सोलर-हाइड्रो’ (Solar-Hydro) तकनीक के रूप में एक ऐसी ‘संजीवनी’ तैयार की है, जो हवा को ही पानी के एक असीमित कुएं में बदल देती है।
क्या है ‘सोलर-हाइड्रो’ पैनल और यह कैसे काम करता है?
दिखने में यह उपकरण छतों पर लगने वाले सामान्य सौर ऊर्जा पैनल (Solar Panel) जैसा ही प्रतीत होता है, लेकिन इसके भीतर एक अत्यंत उन्नत नैनो-तकनीक (Nano-technology) काम कर रही है। इस पैनल के अंदर विशेष प्रकार के ‘सुपर-एब्जॉर्बेंट’ (नमी सोखने वाले) रसायनों और सरंध्र (Porous) सामग्रियों का उपयोग किया गया है।
रात के समय जब हवा ठंडी होती है, तो यह पैनल स्पंज की तरह हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapor) को अपने अंदर सोख लेता है। दिन के समय जब सूर्य की तेज किरणें इस पैनल पर पड़ती हैं, तो सौर ऊर्जा की गर्मी से वह सोखी गई नमी वाष्प बनकर उड़ने लगती है। इस वाष्प को पैनल के भीतर ही एक संघनन कक्ष (Condensation Chamber) में भेजा जाता है, जहां वह ठंडी होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है और नीचे लगे एक टैंक में शुद्ध पेयजल के रूप में जमा हो जाती है।
रेगिस्तान और कम नमी वाले इलाकों में भी कारगर
इस स्वदेशी तकनीक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसे विशेष रूप से शुष्क (Arid) भौगोलिक परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। हवा से पानी बनाने वाली पुरानी मशीनें केवल उन तटीय इलाकों में काम करती थीं जहां हवा में 60 से 70 प्रतिशत नमी (Humidity) होती थी। लेकिन यह नया ‘सोलर-हाइड्रो’ पैनल राजस्थान के थार रेगिस्तान या कच्छ के रण जैसे इलाकों में भी आसानी से काम करता है, जहां हवा में नमी का स्तर मात्र 15 से 20 प्रतिशत तक होता है।
बिना बिजली के 20 लीटर पानी का उत्पादन
यह पैनल पूरी तरह से ‘ऑफ-ग्रिड’ (Off-grid) है, जिसका अर्थ है कि इसे चलाने के लिए बाहर से किसी भी प्रकार की बिजली, बैटरी या जनरेटर की आवश्यकता नहीं होती। यह 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा (Solar Energy) से संचालित होता है। एक सामान्य आकार का पैनल एक दिन (24 घंटे के चक्र) में 20 लीटर तक एकदम शुद्ध पानी उत्पन्न कर सकता है, जो एक औसत परिवार की दैनिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। पानी को पीने योग्य बनाने के लिए इसमें एक इन-बिल्ट कार्बन फिल्टर भी लगाया गया है जो धूल और कीटाणुओं को नष्ट कर देता है।
सेना, गांव और आपदा प्रबंधन के लिए ‘वरदान’
इस पोर्टेबल और सस्ते पैनल का सबसे बड़ा लाभ दूरदराज के गांवों और उन सैन्य चौकियों (Military Outposts) को मिलेगा जो पहाड़ों या रेगिस्तानों में स्थित हैं और जहां पानी के टैंकर पहुंचाना लगभग असंभव होता है। इसके अलावा, भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जब स्वच्छ पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है, तब यह उपकरण राहत शिविरों में जीवन रक्षक का काम करेगा। यह आविष्कार इस बात का प्रमाण है कि भारतीय विज्ञान अब आम आदमी की बुनियादी समस्याओं का वैश्विक समाधान निकाल रहा है।



