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जिनेवा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित उपयोग के लिए ‘वैश्विक आचार संहिता’ पर महामंथन

जिनेवा/नई दिल्ली (प्रौद्योगिकी एवं अंतरराष्ट्रीय डेस्क): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के तेजी से होते विकास और इसके अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न होने वाले खतरों को देखते हुए पूरी दुनिया अब सतर्क हो गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व के प्रमुख देशों के प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा एआई प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, पारदर्शी और नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक ‘वैश्विक आचार संहिता’ (Global Code of Conduct) को लागू करना था।

एआई विनियमन की आवश्यकता क्यों?
पिछले कुछ वर्षों में एआई ने स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग सहित हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है। लेकिन इसके साथ ही ‘डीपफेक’ (Deepfake) के जरिए दुष्प्रचार, साइबर सुरक्षा पर मंडराते खतरे, स्वायत्त हथियारों (Autonomous Weapons) के निर्माण और बड़े पैमाने पर रोजगार छिनने जैसी गंभीर चिंताएं भी विश्व पटल पर उभरी हैं। सम्मेलन में उपस्थित नेताओं ने एक स्वर में स्वीकार किया कि यदि एआई को बिना किसी मानवीय और नैतिक नियंत्रण के विकसित होने दिया गया, तो यह मानवता के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।

प्रस्तावित ‘वैश्विक आचार संहिता’ के मुख्य स्तंभ
जिनेवा सम्मेलन में जिस आचार संहिता पर विचार-विमर्श हुआ, उसके कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

पारदर्शिता और जवाबदेही: तकनीक बनाने वाली कंपनियों को यह स्पष्ट करना होगा कि उनके एआई मॉडल किस प्रकार के डेटा पर प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। यदि कोई एआई प्रणाली किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाती है, तो उसके विकासकर्ताओं की जवाबदेही तय की जाएगी।

मानव-केंद्रित दृष्टिकोण: एआई का विकास इस प्रकार होना चाहिए कि वह मानव अधिकारों, निजता (Privacy) और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करे। एल्गोरिदम में किसी भी प्रकार के नस्लीय या लैंगिक पूर्वाग्रह (Bias) को रोकना अनिवार्य होगा।

सुरक्षा मानक: अत्यंत शक्तिशाली और उन्नत एआई मॉडलों को बाजार में उतारने से पहले उनका कठोर ‘सुरक्षा परीक्षण’ (Safety Testing) किया जाना आवश्यक होगा।

विकासशील देशों का पक्ष और तकनीकी एकाधिकार
सम्मेलन के दौरान विकासशील देशों ने इस बात पर जोर दिया कि एआई के विनियमन की आड़ में चंद विकसित देशों या बड़ी बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों (Big Tech) का एकाधिकार स्थापित नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि एआई से जुड़े लाभ और तकनीक का हस्तांतरण समान रूप से सभी देशों के साथ साझा किया जाना चाहिए ताकि वैश्विक स्तर पर ‘डिजिटल असमानता’ (Digital Divide) को रोका जा सके।

जिनेवा में हुआ यह सम्मेलन एआई प्रशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि विभिन्न देशों के भू-राजनीतिक हितों के कारण एक सर्वमान्य वैश्विक संधि तक पहुंचना एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इस महामंथन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक को अब केवल कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। आने वाला समय इस बात का गवाह बनेगा कि मानवता अपने द्वारा निर्मित इस सबसे शक्तिशाली उपकरण को किस तरह से अनुशासित करती है।

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