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जनसांख्यिकीय संकट का तकनीकी समाधान

जापान ने पास किया ऐतिहासिक 'रोबोटिक वर्कफोर्स' कानून, इंसानों की जगह रोबोट रखने पर मिलेगी भारी टैक्स छूट

टोक्यो (इंटरनेशनल एवं टेक डेस्क): दुनिया भर में अपनी उन्नत तकनीक और नवाचार के लिए मशहूर जापान ने अपने सबसे गहरे ‘जनसांख्यिकीय संकट’ (Demographic Crisis) से निपटने के लिए आज एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। जापानी संसद (डाइट) ने देश में ‘रोबोटिक वर्कफोर्स’ (Robotic Workforce) को मुख्यधारा में लाने के लिए एक नया कानून सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इस नए और अपनी तरह के दुनिया के पहले कानून के तहत, जो भी उद्योग और कंपनियां इंसानी मजदूरों की जगह काम करने वाले उन्नत रोबोट्स (Robots) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मशीनों को काम पर रखेंगी, उन्हें कॉरपोरेट टैक्स में भारी छूट और विशेष सरकारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

जनसांख्यिकीय संकट: आखिर क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?
इस कड़े और अनोखे कानून के पीछे जापान की एक बेहद डरावनी सामाजिक सच्चाई छिपी है। जापान की आबादी दुनिया में सबसे तेजी से बूढ़ी हो रही है। देश की जन्म दर (Birth rate) अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर है और काम करने वाले युवाओं (Working-age population) की संख्या में भारी गिरावट आई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कारखानों, कृषि खेतों, अस्पतालों और यहां तक कि सुविधा स्टोर (Convenience stores) में भी काम करने के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं। इस भयंकर ‘लेबर शॉर्टेज’ (मजदूरों की कमी) के कारण जापान की अर्थव्यवस्था के ठप्प होने का खतरा मंडरा रहा था। सांस्कृतिक रूप से विदेशी प्रवासियों (Immigrants) को बड़े पैमाने पर स्वीकार करने के बजाय, जापान ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता पर भरोसा जताते हुए ‘मशीनी इंसानों’ का रुख किया है।

नए कानून के अहम प्रावधान और ‘रोबोटिक्स लोन’
इस नए कानून के अनुसार, कोई भी जापानी कंपनी, चाहे वह बड़ी विनिर्माण (Manufacturing) इकाई हो या कोई छोटा रेस्तरां, यदि वह ऑटोमेशन में निवेश करती है, तो उसे रोबोट की खरीद और उसके मेंटेनेंस पर 30% से 50% तक की भारी टैक्स छूट मिलेगी। इसके अलावा, सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए शून्य ब्याज दर पर ‘रोबोटिक लोन’ (Robotic Loans) की भी घोषणा की है ताकि वे भी महंगी मशीनें खरीद सकें। यह कानून विशेष रूप से उन रोबोट्स को प्राथमिकता देता है जो बुजुर्गों की देखभाल (Eldercare), कृषि कार्यों और खतरनाक भारी निर्माण कार्यों (Construction) में इंसानों की सुरक्षित रूप से जगह ले सकते हैं।

इंसानों की नौकरियां छिनने का डर नहीं
जब भी रोबोट्स की बात आती है, तो सबसे पहला डर नौकरियां छिनने का होता है। लेकिन जापानी सरकार का तर्क बिल्कुल अलग है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि ये रोबोट्स इंसानों की नौकरियां नहीं छीन रहे हैं, बल्कि वे उन खाली जगहों (Vacancies) को भर रहे हैं जहां काम करने के लिए देश में कोई इंसान बचा ही नहीं है। जापान का उद्देश्य एक ऐसा ‘सुपर-स्मार्ट सोसाइटी’ (जिसे वे Society 5.0 कहते हैं) बनाना है जहां इंसान और मशीन कंधे से कंधा मिलाकर काम करें और इंसान केवल रचनात्मक (Creative) और प्रबंधन (Management) वाले कार्य करे, जबकि शारीरिक मेहनत वाले उबाऊ काम रोबोट्स संभालें।

दुनिया के लिए एक बड़ा सबक और चेतावनी
जापान का यह ‘रोबोटिक वर्कफोर्स एक्ट’ पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी केस स्टडी बन गया है। दक्षिण कोरिया, चीन और कई यूरोपीय देश (जैसे इटली और जर्मनी) भी बहुत जल्द इसी तरह के जनसांख्यिकीय संकट का सामना करने वाले हैं। यदि जापान का यह तकनीकी दांव सफल होता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और काम करने के पारंपरिक तरीकों (Future of Work) में एक अभूतपूर्व बदलाव लाएगा। आज के इस फैसले ने यह तय कर दिया है कि भविष्य के जापान में ‘कर्मचारी’ का मतलब केवल हाड़-मांस का इंसान नहीं, बल्कि सिलिकॉन और कोडिंग से बनी एक मशीन भी होगा।

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