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विशाल बिल्लियों के प्राकृतिक वास पुनर्स्थापन के लिए कॉर्पोरेट वित्तपोषण आवश्यक : भूपेंद्र यादव

नई दिल्ली : केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विशाल बिल्लियों के प्राकृतिक वास पुनर्स्थापन, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी और सर्वेक्षण, सामुदायिक संरक्षण, क्षमता निर्माण और संरक्षण जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मदद के लिए कॉर्पोरेट वित्त पोषण आवश्यक है। सोमवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और समाज का भविष्य और विजन फॉर इंडिया एट 100 विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत 1 और 2 जून को नई दिल्ली में पहले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट शिखर सम्मेलन की मेजबानी में करेगा। इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विश्व की सात विशाल बिल्लियों (बिग कैट)- बाघ, शेर, चीता, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जगुआर और प्यूमा- के संरक्षण की पहल है। अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस का मुख्यालय भारत में है।

 

भूपेन्द्र यादव ने सभी से बिग कैट को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके भविष्य की रक्षा कर हम अपना भविष्य भी बचा रहे हैं, क्योंकि बडे शिकारी और संरक्षित वन्य जीव प्रजाति होने के नाते, बिग कैट पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं तथा विशाल भूभागों, जैव विविधता और जल संसाधनों की रक्षा करते हैं।

 

उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा, स्टार्टअप विकास और विनिर्माण द्वारा वैश्विक परिवर्तन को आकार देने में योगदान दे रहा है।

 

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापन क्षमता में भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता मार्च 2026 तक 150 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो 2014 में 2.82 गीगावाट थी। उन्होंने कहा कि भारत की स्थापित विद्युत क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त होता है, जिसे वर्ष 2030 की समयसीमा से पहले ही हासिल कर लिया गया है।

 

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि भारत ने 2005 से 2020 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी की है और हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को स्थिर करने संबंधी अंतरराष्ट्रीय समझौता) और पेरिस समझौते के ढांचे के तहत अपनी पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट जारी की है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने प्रति व्यक्ति उत्सर्जन में कमी लाते हुए और गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी हासिल की है। उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है: कि हमें एक विकसित, समावेशी, नवोन्मेषी, संवहनीय और आत्मविश्वासी भारत का निर्माण करना है जो वैश्विक शांति और समृद्धि में सार्थक योगदान दे।

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