उत्तर कोरिया का ऑटोमैटिक परमाणु अटैक प्लान: अगर किम जोंग उन को कुछ हुआ, तो अपने आप फटेगा परमाणु बम; दुनिया में दहशत
प्योंगयांग : उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में एक खौफनाक संशोधन किया है, जिसके तहत अब देश के ‘न्यूक्लियर बटन’ को ऑटोमैटिक मोड पर डाल दिया गया है। नए कानून के मुताबिक, अगर किम जोंग उन की किसी हमले में हत्या होती है या देश की परमाणु संपत्तियों पर खतरा मंडराता है, तो बिना किसी मानवीय आदेश के उत्तर कोरिया परमाणु हमला (Nuclear Strike) कर देगा।
ईरान की घटना से डरे तानाशाह!
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम ईरान में हुए हालिया घटनाक्रमों का नतीजा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत और वहां के शीर्ष नेतृत्व पर अमेरिका-इजराइल के हमलों ने किम जोंग उन को अंदर तक हिला दिया है। ईरान ने भी अपने न्यूक्लियर कमांड में बदलाव किए हैं ताकि नेतृत्व खत्म होने के बाद भी हमला न रुके। प्योंगयांग ने इससे सबक लेते हुए अपनी ‘ऑटोमैटिक रिटेलिएशन’ (स्वचालित जवाबी कार्रवाई) नीति तैयार की है।
मार्च में बदला कानून, अब खुली पोल
दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने यह संवैधानिक बदलाव मार्च 2026 में ही कर लिया था, लेकिन अब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई है। नया कानून साफ कहता है कि अगर ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ (शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की रणनीति) के जरिए किम जोंग उन को निशाना बनाया जाता है, तो देश का परमाणु सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाएगा। यह एक तरह का ‘डेड हैंड’ सिस्टम है, जो नेतृत्व के न रहने पर भी दुश्मन को तबाह करने की गारंटी देता है।
‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ की रणनीति हुई बेकार
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया अक्सर उत्तर कोरिया की सैन्य शक्ति को कमजोर करने के लिए उसके नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति पर चर्चा करते रहे हैं। लेकिन किम के इस नए ‘ब्रह्मास्त्र’ ने इस रणनीति को बेकार कर दिया है। अब कोई भी देश उत्तर कोरियाई नेतृत्व पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेगा, क्योंकि ऐसा करना पूरे क्षेत्र को परमाणु युद्ध की आग में झोंकने जैसा होगा।
दुनिया के लिए खतरे की घंटी
उत्तर कोरिया पहले से ही एक घोषित परमाणु शक्ति है और वह लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को उन्नत कर रहा है। संविधान में इस नए बदलाव के बाद अब तनाव चरम पर पहुंच गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में किसी भी गलतफहमी के कारण होने वाले परमाणु युद्ध की संभावना को भी बढ़ा देगा। उत्तर कोरिया अब एक ऐसी स्थिति में है जहां उसका ‘न्यूक्लियर बटन’ सीधे उसकी सत्ता और किम जोंग उन की सांसों से जुड़ गया है।



