असम में एनडीए (NDA) की हैट्रिक: बीजेपी ने 82 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में की शानदार वापसी

गुवाहाटी (इलेक्शन डेस्क): पूर्वोत्तर भारत के सबसे प्रमुख राज्य असम के विधानसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वहां की जनता ने स्थिरता, सुरक्षा और विकास पर अपना पूर्ण भरोसा जताया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर एक नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। 126 सदस्यीय असम विधानसभा में एनडीए ने 82 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर अपना एकाधिकार कायम रखा है। यह जीत न केवल असम में, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में बीजेपी की गहरी और मजबूत होती जड़ों का सबसे बड़ा और स्पष्ट प्रमाण है।
‘डबल इंजन’ सरकार और कल्याणकारी योजनाओं पर मुहर
असम में मिली इस ऐतिहासिक हैट्रिक का सबसे बड़ा श्रेय राज्य सरकार की धरातल पर उतरी कल्याणकारी योजनाओं और केंद्र व राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार के विकास मॉडल को जाता है। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि विशेष रूप से महिलाओं के लिए चलाई गई ‘ओरुनोदोई’ (Orunodoi) योजना ने इस चुनाव में एक मास्टरस्ट्रोक और ‘गेम चेंजर’ (Game Changer) की भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत राज्य की लाखों महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में मिलने वाली आर्थिक सहायता ने महिला मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को बीजेपी का वफादार और ‘साइलेंट वोटर’ बना दिया। इसके अतिरिक्त, राज्य में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का तेज विकास, ब्रह्मपुत्र नदी पर नए पुलों का निर्माण और बाढ़ प्रबंधन की दिशा में किए गए ठोस कार्यों ने आम जनता को खासा प्रभावित किया।
निर्णायक नेतृत्व और असमिया अस्मिता की रक्षा
इस प्रचंड जीत के पीछे राज्य के नेतृत्व की एक अहम भूमिका रही है। चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने न केवल विकास के एजेंडे को प्रमुखता से सामने रखा, बल्कि असम की मूल संस्कृति, भूमि और पहचान (Assamese Identity) की रक्षा के मुद्दे को भी आक्रामकता के साथ जनता के बीच उठाया। राज्य में उग्रवाद पर लगाम कसने, दशकों पुराने बोडो (Bodo) और कार्बी (Karbi) जैसे विद्रोही गुटों के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते करने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों ने जनता के बीच एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल का संदेश दिया।
विपक्ष की रणनीति और गठबंधन रहा पूरी तरह विफल
दूसरी ओर, सत्ता में वापसी का सपना देख रही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का गठबंधन असम की जनता का विश्वास जीतने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ। विपक्ष के पास न तो कोई स्पष्ट और सर्वमान्य नेतृत्व था और न ही कोई ऐसा ठोस विजन जो सत्तारूढ़ दल के विकास के नैरेटिव (Narrative) को काट सके। चुनाव से ठीक पहले विपक्षी खेमे में सीट बंटवारे को लेकर मची अंदरूनी कलह और एआईयूडीएफ (AIUDF) के साथ उनके समीकरणों ने उनकी चुनावी संभावनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। विपक्ष राज्य सरकार के खिलाफ कोई मजबूत सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) खड़ी ही नहीं कर सका।
पूर्वोत्तर में अजेय हुआ एनडीए
असम की इस शानदार जीत के बाद गुवाहाटी स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में भारी जश्न का माहौल है। कार्यकर्ता गुलाल उड़ाकर और मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक हैट्रिक की खुशियां मना रहे हैं। असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाना यह स्पष्ट करता है कि पूर्वोत्तर भारत अब पूरी तरह से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है और एनडीए ने वहां अपना एक अजेय दुर्ग स्थापित कर लिया है। अब पूरी राजनीतिक बिरादरी की निगाहें नई सरकार के भव्य शपथ ग्रहण समारोह और आगामी कैबिनेट के स्वरूप पर टिकी हैं।



