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कर्नाटक सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए भारत की पहली डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली शुरू की 

प्लेटफॉर्म-आधारित श्रम शक्ति के अधिकारों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से, कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक तौर पर गिग वर्कर्स के लिए एक विशेष शिकायत निवारण तंत्र क्रियान्वित किया है। भारत में अपनी तरह की यह पहली व्यवस्था कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स बोर्ड द्वारा ई-गवर्नेंस विभाग के सहयोग से विकसित की गई है।
इस नई पहल के लागू होने के साथ ही , गिग वर्कर्स अब एकीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (IPGRS) पोर्टल के माध्यम से भुगतान, काम करने की स्थिति और प्लेटफॉर्म-विशिष्ट विवादों सहित अपनी शिकायतें आधिकारिक तौर पर दर्ज करा सकते हैं। यह कर्नाटक के लाखों गिग वर्कर्स और उनके द्वारा सेवा दिए जाने वाले तकनीकी एग्रीगेटर्स के बीच एक औपचारिक सेतु का निर्माण करता है। इससे उस कार्यबल के लिए पारदर्शिता और कानूनी समाधान मिलने की उम्मीद है, जो अब तक बिना किसी औपचारिक विवाद समाधान ढांचे के काम कर रहा था।कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) अधिनियम और नियम के तहत, प्रत्येक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को एक आंतरिक विवाद समाधान समिति (IDRC) का गठन करना अनिवार्य है। ‘नम्मा यात्री’ (Namma Yatri) और ‘युलु’ (Yulu) जैसे प्लेटफॉर्म ने अपने IDRC संपर्क विवरण को पहले ही सरकारी पोर्टल के साथ एकीकृत कर लिया है। अतिरिक्त श्रम आयुक्त और बोर्ड के सीईओ जी. मंजूनाथ ने कहा, “अमेज़न सहित अन्य प्लेटफॉर्म भी शामिल होने (onboarding) की प्रक्रिया में हैं।”

IPGRS पर दर्ज की गई शिकायतें स्वचालित रूप से संबंधित प्लेटफॉर्म की IDRC को भेज दी जाएंगी, जिन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर हल करना होगा। सरकार एक केंद्रीय सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करेगी, जो श्रमिकों और प्लेटफार्मों के बीच संचार के सुचारू और पारदर्शी प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया की निगरानी करेगी। श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा कि देश की तकनीकी राजधानी होने के नाते कर्नाटक इस क्षमता का उपयोग श्रमिक कल्याण के लिए भी कर रहा है। उन्होंने कहा, “इस प्रणाली को शुरू करके, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि गिग इकोनॉमी अब एक अनौपचारिक क्षेत्र नहीं बल्कि एक व्यवस्थित क्षेत्र है, जहाँ हर कार्यकर्ता की आवाज़ सुनी जाती है।”

12 लाख श्रमिकों का पंजीकरण हुआ :

अतिरिक्त श्रम आयुक्त जी. मंजूनाथ के अनुसार, अब तक प्लेटफार्मों द्वारा 12 लाख सक्रिय गिग वर्कर्स का विवरण साझा किया गया है। हालांकि, यह देखते हुए कि कई गिग वर्कर्स एक से अधिक प्लेटफार्मों के साथ काम करते हैं, उन्होंने दोहराव (overlaps) की संभावना से इनकार नहीं किया।
उन्होंने कहा, “हम अपने सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रत्येक गिग वर्कर को एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Identification Number) देकर डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटा देंगे।” सॉफ्टवेयर को सक्षम करने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। गिग वर्कर्स के लिए उनके काम करने वाले प्लेटफॉर्म के आधार पर योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है, जिन्हें अगली बोर्ड बैठक में विचार-विमर्श के लिए रखा जाएगा। श्री मंजूनाथ ने बताया, “योजनाएं प्लेटफार्मों के प्रकार के आधार पर भिन्न होंगी। उदाहरण के लिए, कैब की सवारी ज्यादातर पुरुषों द्वारा की जाती है, जबकि शहरी घरेलू गतिविधियां ज्यादातर महिलाओं द्वारा की जाती हैं। यह उनके योगदान और उनके द्वारा किए गए काम की मात्रा पर भी आधारित हो सकता है। कुछ गिग वर्कर्स आठ घंटे से अधिक काम करते हैं, जबकि कुछ केवल कुछ ही गिग्स पर काम कर सकते हैं। इसलिए, कार्यभार, कार्य की प्रकृति और कार्य की समय अवधि अलग-अलग हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “इसे उनके प्रयास और श्रम के आधार पर वैज्ञानिक रूप से तैयार किया जाना है। हम UWE ब्रिस्टल, किंग्स कॉलेज और IISc के शिक्षाविदों सहित विशेषज्ञों और बोर्ड के सदस्यों सहित अन्य हितधारकों के साथ काम कर रहे हैं।” एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म 5 जुलाई से दूसरी तिमाही के लिए आवंटित सीमा के साथ 1% कल्याण योगदान (Welfare Contribution) भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे।

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