पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी
अंतरराष्ट्रीय मंच से पाकिस्तान बेनकाब, 'स्टेट-स्पॉन्सर्ड' आतंकवाद पर कड़े एक्शन की मांग

जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत वादियों में बसे पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले को पूरा एक साल बीत चुका है, लेकिन उस दर्दनाक दिन के घाव आज भी हरे हैं। इस हमले की पहली बरसी (First Anniversary) के मौके पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की नापाक हरकतों के खिलाफ आवाजें तेज हो गई हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस से एक बार फिर पाकिस्तान के खिलाफ तीखे स्वर उठे हैं, जहां उस पर सीधे तौर पर आतंकवाद को राज्य की नीति (State Policy) के रूप में इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पाकिस्तान की दोहरी नीति पर उठे गंभीर सवाल
पेरिस से सामने आई हालिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हो रही चर्चाओं के अनुसार, पाकिस्तान पर एक बार फिर आतंकवाद को प्रायोजित करने (Sponsoring Terrorism) और राज्य समर्थित (State-Backed) आतंकी तत्वों को पनाह देने के आरोप लगे हैं। वैश्विक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कूटनीतिक जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल लगातार पड़ोसियों के खिलाफ छद्म युद्ध (Proxy War) छेड़ने के लिए कर रहा है।
पहलगाम हमले की बरसी ने वैश्विक समुदाय को यह याद दिलाने का काम किया है कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती और इसे पनाह देने वाले देशों पर अब कठोर लगाम कसने की जरूरत है।
2025 के पहलगाम हमले का वो काला दिन
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में पहलगाम में हुए उस बर्बर आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस हमले में आतंकियों ने कायरता की सारी हदें पार करते हुए कई निर्दोष नागरिकों को अपना निशाना बनाया था। इस खूनी खेल में कई आम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उस घटना ने न केवल कश्मीर की शांति को भंग करने की कोशिश की थी, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार किया था। आज एक साल बाद भी, उन निर्दोष पीड़ितों के परिवार न्याय की आस लगाए बैठे हैं।
अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही (International Accountability) तय करने की मांग
पेरिस में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों और चर्चाओं का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब दुनिया भर में पाकिस्तान की ‘अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही’ तय करने की मांग जोर पकड़ रही है।
* वैश्विक प्रतिबंधों की मांग: अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की जा रही है कि वह केवल निंदा प्रस्तावों तक सीमित न रहे, बल्कि टेरर फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंध लगाए।
* FATF जैसी संस्थाओं की भूमिका: जानकारों का मानना है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) जैसी वैश्विक संस्थाओं को ऐसे मामलों का संज्ञान लेते हुए पाकिस्तान पर शिकंजा कसना चाहिए।
पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पेरिस से उठी ये आवाजें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अब दुनिया आतंकवाद के मुद्दे पर मूक दर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। भारत हमेशा से ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के ‘टेरर नेटवर्क’ को बेनकाब करता रहा है। अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंच एकजुट होकर ‘स्टेट-स्पॉन्सर्ड’ आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ें, ताकि भविष्य में किसी और पहलगाम जैसी त्रासदी को दोहराया न जा सके।



