इजरायल ने चुना अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद का नया प्रमुख

इजरायल ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) के नए प्रमुख के रूप में रोमन गोफमैन (Roman Gofman) की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। रविवार (12 अप्रैल, 2026) को इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिसंबर 2025 में गोफमैन को नामांकित करने के अपने इरादे की घोषणा की थी, और वरिष्ठ नियुक्तियों के लिए बनी एक समिति ने इस निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी।
आपको बता दें कि इजरायल इस समय लेबनान और हिजबुल्ला के खिलाफ कठोर सैन्य अभियान में लगा है।
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान पर अपने हमले के तहत पूरे के पूरे गांव तबाह कर दिए हैं। उन्होंने घरों में विस्फोटक लगाकर उन्हें मिट्टी में मिला दिया और दूर से ही बड़े धमाके करके उन्हें ध्वस्त कर दिया। ‘द गार्डियन’ के अनुसार, सोशल मीडिया पर कई वीडियो पोस्ट किए गए, जिनमें इजरायल को इजरायल-लेबनान सीमा पर स्थित तैबेह, नकौरा और देर सेरियन गांवों में बड़े पैमाने पर धमाके करते हुए दिखाया गया है। लेबनानी मीडिया ने सीमावर्ती अन्य गांवों में भी ऐसे ही बड़े धमाकों की खबरें दी हैं, लेकिन इन दावों की पुष्टि के लिए सैटेलाइट तस्वीरें आसानी से उपलब्ध नहीं थीं।
ये धमाके तब किए गए, जब इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने उत्तरी इजरायल में रहने वाले समुदायों पर मंडरा रहे खतरों को रोकने के लिए सीमावर्ती गांवों के सभी घरों को गाजा के रफाह और बेत हनौन में अपनाए गए मॉडल के अनुसार नष्ट करने का आह्वान किया था। इजरायली सेना ने दक्षिणी गाजा के रफाह में 90 फीसदी घरों को नष्ट कर दिया था।
गाजा में घरों को बड़े पैमाने पर नष्ट करने की इस रणनीति को, जहां इजरायल पर नरसंहार करने का आरोप लगा है, शिक्षाविदों ने ‘डोमिसाइड’ नाम दिया है। यह एक ऐसी रणनीति है जिसका इस्तेमाल नागरिकों के घरों को सुनियोजित तरीके से नष्ट करने और नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है, ताकि पूरे के पूरे इलाकों को रहने लायक न छोड़ा जाए। इजरायली सेना ने कहा है कि इन तोड़फोड़ की कार्रवाइयों के जरिए वे हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जैसे कि सुरंगें और सैन्य ठिकाने, जिनके बारे में उनका दावा है कि इस हथियारबंद गुट ने उन्हें आम नागरिकों के घरों में छिपा रखा है।
इजरायल ने कहा है कि वह दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेगा, और लिटानी नदी तक के पूरे इलाके में एक सुरक्षा क्षेत्र स्थापित करेगा। साथ ही, विस्थापित लोगों को तब तक अपने घरों में लौटने की इजाजत नहीं दी जाएगी जब तक कि इजरायल के उत्तरी शहरों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती। इस बात से यह चिंता पैदा हो गई है कि यह विस्थापन लंबे समय तक चल सकता है। हालांकि, मानवाधिकार समूहों ने कहा है कि दूर से किए जाने वाले ये बड़े पैमाने के धमाके एक तरह की अंधाधुंध तबाही माने जा सकते हैं, जोकि एक युद्ध अपराध है। युद्ध के नियम आम नागरिकों के घरों को जान-बूझकर तबाह करने की मनाही करते हैं, सिवाय उन मामलों के जब ऐसा करना किसी वैध सैन्य कारण से जरूरी हो।



