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जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत आंध्र प्रदेश ने किया विशेष काम 

आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में सामुदायिक नेतृत्व वाली वर्षाजल संरक्षण पहलों ने गांवों का कायापलट कर दिया है। आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में मुरुगुम्मी, मारेला और थंगेला जैसे गांव, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत कार्यान्वित सामुदायिक नेतृत्व वाली वर्षाजल संरक्षण पहलों के माध्यम से जल संरक्षण के आदर्श मॉडल बनकर उभरे हैं। इस पहल से क्षेत्र में भूजल की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, आजीविका मजबूत हुई है और संकटग्रस्त पलायन में कमी आई है।

पहले, अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बार-बार बोरवेल खराब होने के कारण इन गांवों में पानी की भारी कमी थी, जिससे कृषि और आजीविका बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। ग्राम सभाओं, घर-घर जाकर जागरूकता अभियान, कलाजाथाओं, कार्यशालाओं और जमीनी प्रदर्शनों के माध्यम से सक्रिय सामुदायिक लामबंदी के कारण स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ। किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय संस्थानों ने मिलकर जल बजट, फसल योजना और भूजल साझाकरण जैसी प्रथाओं को अपनाया, जिससे स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।

पहाड़ी से घाटी तक की पद्धति को अपनाते हुए, गांवों ने वर्षा जल संचयन, भंडारण और पुनर्भरण के लिए कई उपाय लागू किए। इनमें मुख्य रूप से रिसने वाले टैंक, खेत के तालाब, अलग-अलग ढलानों पर बनी खाइयां, छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सामुदायिक तालाबों का जीर्णोद्धार शामिल हैं।

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