यूपी के किसानों के लिए बड़ी खबर: ओलावृष्टि पर सीएम योगी ने दिए तुरंत मुआवजे के निर्देश, MSP पर गेहूं बेचने के लिए नई ID हुई अनिवार्य

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से दो बेहद अहम फैसले सामने आए हैं। एक तरफ जहां बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से परेशान किसानों को बड़ी राहत देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त निर्देश जारी किए हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेचने वाले किसानों के लिए एक नया नियम भी लागू कर दिया गया है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि: 24 से 48 घंटे में मिलेगा मुआवजा
हाल ही में प्रदेश के कई जिलों में अचानक मौसम ने करवट ली है। तेज आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण रबी की तैयार फसलों (विशेषकर गेहूं, सरसों, मटर और चना) को भारी नुकसान पहुंचा है। इस गंभीर स्थिति का तुरंत संज्ञान लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
सीएम के प्रमुख निर्देश:
त्वरित सर्वे: मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों (DM), एसडीएम और कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों और खेतों का दौरा करें।
जीरो टॉलरेंस: फसल नुकसान के आकलन (सर्वे) में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तत्काल भुगतान: सर्वे की रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराई जाए ताकि 24 से 48 घंटे के भीतर प्रभावित किसानों के बैंक खातों में सीधे (DBT के माध्यम से) मुआवजे की राशि ट्रांसफर की जा सके।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में वह किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी अन्नदाता को आर्थिक संकट से नहीं जूझने दिया जाएगा।
MSP पर गेहूं खरीद के नए नियम: अब अनिवार्य हुई ‘नई ID’
राहत के साथ-साथ, यूपी सरकार ने सरकारी गेहूं खरीद प्रणाली में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने और बिचौलियों को खत्म करने के लिए एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है।
आगामी रबी विपणन वर्ष में एमएसपी (MSP) पर अपना गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए अब किसानों के लिए एक ‘नई किसान आईडी’ (Farmer ID) अनिवार्य कर दी गई है।
क्या है यह नई व्यवस्था और इसके फायदे?
फर्जीवाड़े पर लगाम: खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, इस नई आईडी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फसल का पैसा सीधे वास्तविक किसान को ही मिले, न कि किसी बिचौलिए या व्यापारी को।
पंजीकरण प्रक्रिया: जिन किसानों को अपना गेहूं बेचना है, उन्हें विभागीय पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराकर यह नई आईडी जनरेट करनी होगी। इसके लिए आधार कार्ड, खतौनी (भूमि का रिकॉर्ड) और बैंक पासबुक का लिंक होना जरूरी है।
डिजिटल ट्रैकिंग: इस आईडी के जरिए किसान का पूरा डेटा डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा, जिससे खरीद से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो जाएगी।
किसानों के लिए सलाह
सरकार की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे गेहूं की कटाई और खरीद शुरू होने से पहले ही जन सेवा केंद्रों (CSC) या खाद्य विभाग के पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण पूरा कर लें और अपनी आईडी प्राप्त कर लें। इससे उन्हें क्रय केंद्रों पर अपनी फसल बेचने में किसी भी प्रकार की देरी या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ये दोनों कदम दर्शाते हैं कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। आपदा के समय तुरंत आर्थिक मदद पहुंचाना और सिस्टम में सुधार कर किसानों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित करना, यूपी के कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।



