होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में रूस और चीन ने यूएन के प्रस्ताव पर लगाया वीटो

रूस और चीन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे होकर वैश्विक तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है। 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बहरीन द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव पर मतदान किया। इसके पक्ष में 11 वोट, विपक्ष में दो वोट और दो अनुपस्थित वोट पड़े। पाकिस्तान और कोलंबिया अनुपस्थित रहे। वहीं, अमेरिका, फ्रांस समेत 11 देशों ने इसका समर्थन किया। वीटो शक्ति रखने वाले स्थायी सदस्य रूस और चीन द्वारा प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान करने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को रणनीतिक महत्व वाले जलमार्ग खोलने या अपने बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमलों का सामना करने के लिए निर्धारित की गई समय सीमा से कुछ घंटे पहले यह मतदान हुआ। विश्व के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन आमतौर पर इसी जलमार्ग से होता है और युद्ध के दौरान इस जलडमरूमध्य पर ईरान की मजबूत पकड़ के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू गई हैं।
बहरीन के प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल था?
इसमें व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा मुहैया करना और जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या उसमें हस्तक्षेप करने के प्रयासों को रोकना शामिल किया गया था। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई थी कि ईरान व्यापारिक और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे और होर्मुज जलडमरूमध्य से उनके आवागमन की स्वतंत्रता में बाधा डालना और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना बंद करे।
UNSC में प्रस्ताव पारित होता तो क्या होता? :
हालांकि, यह संदेहजनक है कि यदि यह प्रस्ताव पारित भी हो जाता, तो भी पांचवें सप्ताह में पहुंच चुके इस युद्ध पर इसका कोई प्रभाव पड़ता, क्योंकि रूस और चीन को ‘वीटो’ करने से रोकने के लिए उन्हें मतदान से दूर रखने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव को काफी कमजोर कर दिया गया था।



