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बाबा साहब आंबेडकर के 10 स्मारकों के विकास के लिए योगी सरकार खर्च करेगी 403 करोड़ रुपए

 ( राघवेंद्र प्रताप सिंह): आज 7 अप्रैल 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में योगी सरकार ने आंबेडकर जयंती से पहले बड़े फैसले पर मुहर लगाई है। 14 अप्रैल को पूरे देश में डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है और हर साल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें डॉ अंबेडकर के नाम पर विशेष पहल , योजनाएं लॉन्च करती हैं। कैबिनेट की बैठक में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा में छत्र ( Umbrellas over every Ambedkar statue), बाउंड्रीवॉल और सौंदर्यीकरण करने का प्रस्ताव पास हुआ है। फैसले के मुताबिक योगी सरकार यूपी की सभी 403 विधान सभा सीटों में 10 स्मारकों ( Development of Ten memorial) का विकास करवाएगी। फैसले के अनुसार हर विधानसभा सीट क्षेत्र में डॉ आंबेडकर के 10 स्मारकों के विकास के लिए योगी सरकार 403 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनकी प्रतिमाओं, स्थलों और पार्कों का सौंदर्यीकरण करने का भी फैसला लेटेस्ट मीटिंग में किया है।

गोरखपुर के रामलीला मैदान में भाजपा के स्थापना दिवस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि सरकार ने 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती से पहले राज्यव्यापी कार्यक्रमों की योजना बनाई है।

उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता 14 अप्रैल से एक दिन पहले बूथ स्तर पर अंबेडकर प्रतिमाओं के आसपास के क्षेत्रों की सफाई करेंगे और उस दिन पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। जिन पार्कों में ये प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां भी चारदीवारी बनाई जाएगी और सौंदर्यीकरण का काम किया जाएगा।

इस घोषणा का राजनीतिक महत्व :

2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इस घोषणा को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी विपक्षी पार्टियां दलित मतदाताओं को एकजुट करने के लिए कांशी राम, जगजीवन राम और अंबेडकर जैसे दलित नायकों की जयंती मना रही हैं।
उत्तर प्रदेश की कुल जनसंख्या में दलितों की संख्या लगभग 20.7% (लगभग 41.4 मिलियन) है, जो उन्हें एक महत्वपूर्ण मतदाता समूह बनाती है।

उत्तर प्रदेश में दलित जनसांख्यिकी :

उत्तर प्रदेश में दलितों की 66 उपजातियाँ हैं, जिनमें छह प्रमुख समूह जनसंख्या का 87% हिस्सा हैं। जाटव समुदाय सबसे प्रभावशाली है और बसपा का मुख्य मतदाता आधार माना जाता है।

गैर-जाटव दलित समुदाय—जिनमें पासी, कोरी, धोबी, खाटिक और वाल्मीकि समुदाय शामिल हैं—अधिक बिखरे हुए हैं। भाजपा ने 2017 और 2024 के बीच गैर-जाटव समूहों में अपना समर्थन बढ़ाया, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में भारत गठबंधन की ओर कुछ झुकाव देखा गया।

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