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दुनिया देख रही थी ईरान-अमेरिका की शांति, उत्तर कोरिया ने मिसाइल दागकर मचाई खलबली!

सियोल और प्योंगयांग से आई आज की सबसे बड़ी खबर ने पूरी दुनिया को गहरी चिंता में डाल दिया है। एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया की नजरें पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्ध-विराम और शांति की उम्मीदों पर टिकी हुई थीं, ठीक उसी वक्त उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों को ताक पर रखते हुए एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर दिया। दक्षिण कोरिया की सेना ने इस बात की पुष्टि की है कि ये लॉन्च प्योंगयांग और वॉनसन के इलाकों से किए गए हैं जो सीधे जापान सागर की तरफ दागी गई हैं।

यह परीक्षण उस समय किया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से चला आ रहा भयानक तनाव थोड़ा थमा है। ईरान-अमेरिका युद्ध ने पूरे विश्व की सप्लाई चेन और तेल की कीमतों को बुरी तरह प्रभावित किया था, और अब जब अमेरिका इस मोर्चे पर शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, तब किम जोंग-उन ने इस मिसाइल परीक्षण के ज़रिये अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। दरअसल उत्तर कोरिया ने अमेरिका की इस व्यस्तता का भरपूर फायदा उठाया है। जब अमेरिकी प्रशासन का पूरा ध्यान मिडिल ईस्ट में शांति योजना बनाने पर केंद्रित है, तब उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा कर यह जता दिया है कि वह अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

उत्तर कोरिया की इस मंशा के पीछे गहरी रणनीति छुपी हुई है। किम जोंग-उन चाहते हैं कि उन्हें एक परमाणु शक्ति के रूप में दुनिया से मान्यता मिले। ईरान पर पिछले दिनों हुए हमलों और सैन्य दबाव ने उत्तर कोरिया को यह संदेश दिया है कि अगर उसने अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ाई, तो भविष्य में उस पर भी इसी तरह का दबाव बनाया जा सकता है। इसीलिए वह दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि उन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इन परीक्षणों का असर अब दूर तक देखने को मिलेगा क्योंकि इससे जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अपनी सुरक्षा को लेकर डर बढ़ेगा और पूरे एशिया में हथियारों की एक नई होड़ शुरू हो सकती है।

अंत में यह कहा जा सकता है कि उत्तर कोरिया का आज का कदम सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। जब तक दुनिया ईरान और इजरायल के विवादों को सुलझाने में उलझी रहेगी, उत्तर कोरिया अपनी ताकत बढ़ाने के हर मौके का इस्तेमाल करेगा। यह परीक्षण विश्व समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि एक तरफ की शांति दूसरी तरफ उठने वाले तूफान को रोकने के लिए काफी नहीं है और आने वाले दिनों में इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ तौर पर दिखाई देगा।

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