खेलो इंडिया विंटर गेम्स के लिए गुलमर्ग में सजेगा सपनों का मंच, खिलाड़ी तैयार

गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर) : बर्फ से ढकी ढलानों, देवदार के पेड़ों और पीर पंजाल की गुलाबी सुबह के बीच गुलमर्ग एक बार फिर देश के शीतकालीन खेलों का केंद्र बनने जा रहा है। 23 से 26 फरवरी तक यहां खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 का दूसरा चरण आयोजित होगा। इससे पहले पहला चरण 20 से 26 जनवरी तक लद्दाख में संपन्न हुआ था, जिसमें आइस स्केटिंग और हॉकी जैसे बर्फीले खेल खेले गए थे।
यह लगातार छठा वर्ष है, जब विंटर गेम्स का आयोजन गुलमर्ग में हो रहा है। इसी निरंतरता के कारण गुलमर्ग को “भारत की विंटर स्पोर्ट्स कैपिटल” कहा जाने लगा है।
चार स्पर्धाएं, 400 से अधिक खिलाड़ी
गुलमर्ग चरण में स्की माउंटेनियरिंग, अल्पाइन स्कीइंग, नॉर्डिक स्कीइंग (क्रॉस-कंट्री) और स्नोबोर्डिंग की कुल चार पदक स्पर्धाएं आयोजित होंगी। करीब 400 खिलाड़ी इसमें भाग लेंगे, जिनमें सर्वाधिक संख्या अल्पाइन स्कीइंग में होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व में खेलो इंडिया विंटर गेम्स को “नए खेल आत्मविश्वास का प्रतीक” बताया था। उनका कहना था कि गुलमर्ग देशभर के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खिलाड़ियों को एक मंच पर लाता है, जहां भौगोलिक सीमाएं मिट जाती हैं और प्रतिभा एकजुट होती है।
ऊंचाई की चुनौती, जोश में कोई कमी नहीं
समुद्र तल से लगभग 8700 फीट की ऊंचाई पर तैयारी करना आसान नहीं है। जम्मू के अंकुश बाजाला कहते हैं, “यहां सिर्फ पैरों की नहीं, फेफड़ों और धैर्य की भी ट्रेनिंग होती है।” जम्मू की कनिका शान मानती हैं कि खेलो इंडिया ने शीतकालीन खेलों को नई पहचान दी है।
पुणे के ऋषि गुलहाने ऊंचाई के असर को स्वीकार करते हुए कहते हैं, “पहले दो दिन मुश्किल होते हैं, लेकिन फिर यही चुनौती आपको और मजबूत बनाती है।” इंदौर के अतुल वैद गुलमर्ग को “भारत का आल्प्स” बताते हैं।
नए खिलाड़ी भी दिखा रहे दम
हैदराबाद के यशवंत रेड्डी, जो पहले स्काइडाइवर रहे हैं, अब स्कीइंग में हाथ आजमा रहे हैं। केरल से आए मोहम्मद सिनान के लिए यह अनुभव जीवन बदलने वाला है। अंबाला के रोहित सनी कहते हैं कि स्टार्ट गेट पर खड़े होने का दबाव अलग ही होता है।
मध्य प्रदेश के सौरभ साहू का मानना है कि इन खेलों ने देशभर में मानक ऊंचे किए हैं। वहीं हैदराबाद के अद्वित केसी रेड्डी गुलमर्ग को “सपनों का मंच” बताते हैं।
जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों के लिए यह प्रतियोगिता खास मायने रखती है। “यह हमारा घर है, यहां जीतने का अहसास अलग होता है,” कनिका शान कहती हैं।
चार दिनों तक गुलमर्ग की ढलानों पर पदक की जंग होगी। सेना की टीम अपने टीम चैंपियनशिप खिताब का बचाव करेगी। कभी सिर्फ पर्यटन स्थल के रूप में पहचाना जाने वाला गुलमर्ग अब देश का प्रमुख शीतकालीन खेल केंद्र बन चुका है।



