शरद पूर्णिमा पर चन्द्रमा से होगी अमृत वर्षा 9 अक्टूबर

लखनऊ। आाश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते है। शरद पूर्णिमा को ‘कौमुदी व्रत’,‘कोजागरी पूर्णिमा’ और ‘रास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है इस दिन चन्द्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से युक्त होता है और इस दिन चन्द्रमा की चांदनी अमृत से युक्त होती है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 9 अक्टूबर को प्रात: 3:41 से प्रारम्भ होकर 10 अक्टूबर को प्रात: 02:24 तक रहेगी। 9 अक्टूबर पूर्णिमा पर काफी खास संयोग बन रहा है इस दिन धुव्र योग बन रहा है। इसके साथ उत्तराभाद्र और रेवती नक्षत्र बन रहा है। चन्द्रमा मीन राशि का संयोग बना रहे है।चंद्रोदय शाम 5 : 58 पर होगा। यह जानकारी ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल ने दी है।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने ‘रास लीला’ की थी इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते है। इस दिन प्रातः स्नान करके भगवान श्री कृष्ण या श्री विष्णु जी या अपने इष्ट देव का पूजन अर्चना करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए। इस दिन रात में गाय के दूध की खीर बनाकर उसमें घी, चीनी मिलाकर अर्ध रात्रि को भगवान को भोेग लगाकर खीर को चांदनी रात में रखना चाहिए। ऐसा करने से चन्द्रमा की किरणों से अमृत प्राप्त होता है और अर्ध रात्रि मंे चन्द्रमा को भी अर्ध्य देना चाहिए। पूर्णिमा की चांदनी औषधि गुणों से युक्त होती है इसमें रखी खीर का सेवन करने से हमारे चन्द्र ग्रह संबंधी दोष जैसे कि कफ सर्दी छाती के रोग, मानसिक कष्ट या डिप्रेशन की समस्या है और हार्माेस संबंधी रागों में लाभकारी है। ऐसा कथन है कि चांदनी रात में बैठने से और सुई में धागा पिरोने से आंखो की रोशनी तेज होती है और प्रातःकाल सूर्य उदय से पूर्व इस खीर का प्रसाद के रूप में सेवन करना चाहिए जिससे वर्ष भर अरोग्यता होती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुंद्र मंथन से हुई थी इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करने आती हैं और जो लोग रात्रि में भजन कीर्तन करते हुए मां लक्ष्मी का आह्वान करते हैं धन की देवी उनके घर में वास करती है शरद पूर्णिमा को कोजागरी व्रत भी किया जाता है पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम में विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन किया जाता है । माता लक्ष्मी, कुबेर और इन्द्र देव का पूजन और श्री सूक्त, लक्ष्मी स्तोत्र और लक्ष्मी मंत्रों का जाप करते है ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी रात्रि मंे विचरण करती है और भक्तों पर धन-धान्य से पूर्ण करती है।



