गांव की मिट्टी से निकला कप्तान, डूरंड कप तक पहुंचा नोंगकसेह का कारवां
नतीजा उनके पक्ष में नहीं गया, लेकिन हार्डी क्लिफनोंगब्री और नोंगकसेहस्पोर्ट्स सोशल एंड कल्चरल क्लब के लिए 31 जुलाई, 2026 हमेशा क्लब के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक रहेगा।
जबनोंगब्री ने 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप के ग्रुप-ई के अपने पहले मुकाबले में अपनी घरेलू टीम नोंगकसेह की कप्तानी करते हुए शिलांग लाजोंग एफसी के खिलाफ मैदान पर कदम रखा, तो यह सिर्फ एक और फुटबॉल मैच नहीं था।
यह उस शानदार सफर की मंजिल थी, जिसने कुछ ही वर्षों में नोंगकसेह को मेघालय की निचली फुटबॉल लीगों से भारत और एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट तक पहुंचा दिया।
अनुभवी शिलांगला जोंग के खिलाफ 2-0 की हार ने भले ही इस स्तर की चुनौती का एहसास कराया हो, लेकिन इससे उस ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। नोंगब्री के लिए यह उनके फुटबॉल सफर का एक और अहम अध्याय था, जिसकी शुरुआत किसी बड़े स्टेडियम या पेशेवर अकादमी से नहीं, बल्कि मेघालय के गांवों के ऊबड़-खाबड़ मैदानों से हुई थी।
29 वर्षीय नोंगब्री याद करते हैं, “मैंने लगभग सात-आठ साल की उम्र में अपने गांव में दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलना शुरू किया था। हमारे पास न तोपेशेवर सुविधा एंथीं और न ही महंगे उपकरण, लेकिन खेल के प्रति हमारा जुनून ही काफी था। उन कच्चे मैदानों पर खेलते हुए मैंने अनुशासन, टीमवर्क और कभी हार न मानने की सीख हासिल की।”
मेघालय में बड़े होने वाले अनगिनत बच्चों की तरह फुटबॉल उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। गांव के असमतल मैदानों पर खेला गया हर मुकाबला उनके उस सपने को मजबूत करता गया, जिसने आगे चलकर उन्हें राज्य के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल संस्थानों तक पहुंचाया।
साल 2009 में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद उनका चयन मेघालय अंडर-13 टीम में हुआ। यही मौका उनके लिए नई राह लेकर आया। इसके बाद उन्होंने शिलांग स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र में प्रवेश लिया और 2011 में शिलांगलाजोंग की युवा अकादमी से जुड़ गए।
अगले कुछ वर्षों में नोंगब्री ने खुद को मेघालय के भरोसेमंद डिफेंडरों में स्थापित किया और आखिरकार शिलांग लाजोंग की आई-लीग सीनियर टीम में जगह बनाई। इस दौरान उन्होंने कईअनुभवी खिलाड़ियों से प्रेरणा ली, जिन्होंने उनके खेल और सोच को नई दिशा दी।
“मैं आइबोरलांगखोंगजी और रोकसलामारे जैसे खिलाड़ियों को बहुत पसंद करता था। उन्हें खेलते और अभ्यास करते देख मुझे हमेशा प्रेरणा मिलती थी,”उन्होंने कहा। तब तक नोंगब्री एक सम्मानजनक फुटबॉल करियर बना चुके थे।
उन्होंने आई-लीग में शिलांग लाजोंग का प्रतिनिधित्व किया, क्लब की कप्तानी भी की और कई सफल अभियानों का हिस्सा रहे। ऐसे में बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि वह एक ऐसे क्लब में जाएंगे, जो अभी मेघालय की फुटबॉल सीढ़ियां चढ़ ही रहा था।
लेकिन 2025 सीज़न से पहले जबनोंगकसेह ने उनसे संपर्क किया, तो उन्हें इसमें सिर्फ एक नया क्लब नहीं, बल्कि एक बड़े उद्देश्य काअ वसर दिखाई दिया। नोंगब्री बताते हैं, “क्लब के अध्यक्ष ने मेरे सामने अपना विज़न रखा। वह नहीं चाहते थे किनोंगकसेह सिर्फ शिलांग का एक और क्लब बनकर रह जाए।
उनका सपना था कि क्लब धीरे-धीरे आई-लीग 3 से आई-लीग 2 और फिर एक दिन इंडियन सुपर लीग तक पहुंचे। उनका सपना मेरे सपने से मेल खाता था।” यह फैसला आसान नहीं था। अंतिम निर्णय लेने से पहले उन्होंने अपने परिवार से चर्चा की, जिन्होंने उनका पूरा साथ दिया।
सबसे बढ़कर, उन्हें क्लब के अध्यक्ष डेनियलएम. थांगख्यू की ईमानदारी और दूरदृष्टि पर भरोसा था। उन्होंने नोंगकसेह को पीछे की ओर उठाया गया कदम नहीं माना, बल्कि इसे शुरुआत से कुछ नया और स्थायी बनाने का मौका समझा।
उनका यह भरोसा जल्द ही सही साबित हुआ। सिर्फ एक सीज़न के भीतर नोंगकसेह ने चार ट्रॉफियां अपने नाम कीं। इनमें पांचवीं मेघालय स्टेट लीग, 2025 एसएसए चैंपियंस कप और सिक्किम का प्रतिष्ठित ऑल इंडिया चीफ मिनिस्टर गोल्ड कप शामिल हैं।
नेरोका एफसी, रेडपांडा एफसी और बीएसएफ जालंधर जैसी स्थापित टीमों पर मिली जीतने ड्रेसिंग रूम के भीतर यह विश्वास पैदा किया कि वे अब बड़े मंच पर खेलने के हकदार हैं। “मेरे लिए सबसे खास जीत चीफ मिनिस्टर गोल्ड कप रही। यह बेहद प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है और नोंगकसेह के साथ इसे जीतना मेरे लिए अविस्मरणीय अनुभव था, “नोंगब्री कहते हैं।
हालांकि, यह सफलता किसी एक खिलाड़ी की बदौलत नहीं आई। नोंगब्री मानते हैंकि टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामूहिक मानसिकता रही है। “हमारे पास बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं और एक बेहतरीन कोच भी। हर टूर्नामेंट ने हमारा आत्मविश्वास बढ़ाया। नेरोका जैसी टीम को हराने के बाद हमें यकीन हो गया कि हम इस स्तर पर खेलने के योग्य हैं। यही विश्वास हमें लगातार आगे बढ़ाता रहा।”
इसी आत्मविश्वास ने नोंगकसेह को 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप में जगह दिलाई, जो हाल के वर्षों में मेघालय फुटबॉल की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है। हालांकि नोंगब्री इससे पहले शिलांगलाजोंग के साथ दो बार डूरंड कप खेल चुके हैं, लेकिन नोंगकसेह की कप्तानी करते हुए इस प्रतियोगिता में उतरना उनके लिए बिल्कुल अलग मायने रखता है।
“डूरंड कप एक बेहद प्रतिष्ठित टूर्नामेंट है। मुझे बहुत खुशी है कि नोंगकसेह को इसमें खेलने का मौका मिला। शिलांग और आसपास के गांवों के फुटबॉल प्रेमी बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि टूर्नामेंट फिर से यहां आया है और हमें उनका प्रतिनिधित्व करने का गर्व है,”उन्होंने कहा।
लेकिन नोंगकसेह का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सिर्फ कप्तानी करना नहीं है। क्लब की पहचान उसी समुदाय से जुड़ी है, जिसके नाम पर उसका अस्तित्व है, और यही रिश्ता नोंगब्री के लिए सबसे खास है। “हम सिर्फ एक समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि एक परिवार हैं। हम अपने प्रशंसकों और नोंगकसेह के लिए हर लड़ाई साथ मिलकर लड़ते हैं। इस क्लब के लिए हर खिलाड़ी अपना सौ प्रतिशत देताहै,”उन्होंने कहा।
यही भावनानोंगकसेह को एक पारंपरिक सामुदायिक क्लब से मेघालय की सबसे तेजी से उभरती फुटबॉल कहानियों में बदलने का आधार बनी है। डूरंडकप ने भले ही क्लब को राष्ट्रीय पहचान दिलाई हो, लेकिन क्लब के भीतर हर कोई मानता है कि यह लंबी यात्रा का सिर्फ एक पड़ाव है।
शिलांगलाजोंग के खिलाफ शुरुआती हार ने डूरंड कप में पहले अंक की तलाश जरूर टाल दी, लेकिन क्लब के लंबे विज़न पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। अब 6 अगस्त को लैंगस्निंगएफसी के खिलाफ होने वाले अगले अहम ग्रुप-ई मुकाबले में नोंगकसेह के पास एक और मौका होगा यह साबित करने का कि उन्होंने भारत के शीर्ष क्लबों के बीच अपनी जगह क्यों बनाई है।
नोंगब्री के लिए एक मैच कभी भी पूरे प्रोजेक्ट को परिभाषित नहीं कर सकता। उनके सपने किसी एक टूर्नामेंट से कहीं बड़े हैं। “मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य नोंगकसेह को लगातार ऊंचाइयों तक ले जाना है। हम कदम-दर-कदम आई-लीग 3, फिर आई-लीग 2 और एक दिन इंडियन सुपर लीग तक पहुंचना चाहतेहैं। यही मेरा सपनाहै,”उन्होंने कहा।
यह सपना केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे क्लब की महत्वाकांक्षा भी है। एक ऐसे खिलाड़ी के लिए, जो आराम से किसी स्थापित क्लब में अपना करियर जारी रख सकता था, नोंगकसेह को चुनना कभी आसान रास्ता अपनाने का फैसला नहीं था। यह अपने ही घर-आंगन में कुछ स्थायी और सार्थक बनाने की कोशिश थी।
अब जब नोंगकसेह अपने पहले इंडियन ऑयल डूरंड कप अभियान के अगले अध्याय की तैयारी कर रहा है, उसका कप्तान अब तक हासिल उपलब्धियों के बजाय आगे की मंजिलों पर नजर टिकाए हुए है। गांव के मैदानों से डूरंड कप के भव्य मंच तक की एक असाधारण यात्रा क्लब पहले ही पूरी कर चुका है। अगर हार्डी क्लिफ नोंगब्री की सोच पर भरोसा किया जाए, तो यह सफर अभी बस शुरू हुआ है।
