विश्व कप से पहले भारतीय फॉरवर्ड्स का मंत्र: तालमेल, टीमवर्क और निरंतरता
एफआईएच हॉकी विश्व कप-2026 के आगाज में अब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है। ऐसे में भारतीय पुरुष हॉकी टीम अंतिम तैयारियों में जुटी है। टीम के स्टार फॉरवर्ड मनदीप सिंह, अभिषेक और शिलानंद लकड़ा का मानना है कि आधुनिक हॉकी में सफलता के लिए फॉरवर्ड खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल, निरंतरता और टीमवर्क सबसे अहम हैं।
अपने चौथे एफआईएच विश्व कप में उतरने जा रहे अनुभवी फॉरवर्ड मनदीप सिंह ने बोला कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में सीनियर खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखा और अब वही अनुभव युवा खिलाड़ियों के साथ साझा कर रहे हैं।
उन्होंने हॉकी इंडिया के हवाले से कहा, जब मैं युवा था, तब मैं सीनियर खिलाड़ियों से खूब सवाल पूछता था और उनसे बहुत कुछ सीखा। अब मैं वही अनुभव युवा फॉरवर्ड खिलाड़ियों के साथ साझा करता हूं। हम बड़े मुकाबलों में दबाव को संभालने, शांत रहने और सही फैसले लेने पर चर्चा करते हैं।

मनदीप के अनुसार, गोल करने की सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं बल्कि सुनियोजित अभ्यास से मिलती है। उन्होंने कहा, हम फॉरवर्ड खिलाड़ियों के अभ्यास सत्र काफी विशेष होते हैं। हम डी के भीतर तालमेल बनाने, अंतिम पास को सही तरीके से लेने और हर आक्रमण को परिणाम तक पहुंचाने पर लगातार मेहनत करते हैं।
हमारा लक्ष्य हर बार डी में प्रवेश करने पर गोल करना, गोल पर शॉट लगाना या पेनल्टी कॉर्नर हासिल करना होता है। उन्होंने आगे कहा, एक अच्छा स्ट्राइकर सिर्फ गोल करने के बारे में नहीं सोचता। हॉकी टीम का खेल है और साथियों के साथ जितनी बेहतर समझ होगी, उतना ही प्रभावी प्रदर्शन होगा।
अपने पहले एफआईएच विश्व कप की तैयारी कर रहे शिलानंद लकड़ा ने कहा कि सीनियर खिलाड़ियों, खासकर मनदीप सिंह का मार्गदर्शन उनके लिए काफी मददगार रहा है। उन्होंने कहा, जब भी मुझसे कोई गलती होती है, सीनियर खिलाड़ी बताते हैं कि मुझे कहां सुधार करना है।
मनदीप भाई हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं और सही दिशा दिखाते हैं। उनकी सलाह से मुझे लगातार सीखने और बेहतर बनने में मदद मिलती है। लकड़ा का मानना है कि आधुनिक हॉकी में फॉरवर्ड की भूमिका सिर्फ गोल करने तक सीमित नहीं रह गई है।
उन्होंने कहा, मैं हमेशा टीम के लिए हर संभव योगदान देने की कोशिश करता हूं। चाहे मौके बनाना हो, गोल करना हो या टैकल लगाना, मेरी कोशिश हर विभाग में योगदान देने की रहती है। अब फॉरवर्ड खिलाड़ी टीम की पहली रक्षापंक्ति भी होते हैं। यदि हम अच्छी डिफेंस करते हैं तो डिफेंडरों और मिडफील्डरों का काम आसान हो जाता है।
भारतीय टीम के भरोसेमंद गोल स्कोरर अभिषेक ने कहा कि उनकी निरंतरता का राज शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की कड़ी तैयारी है। उन्होंने कहा, एक स्ट्राइकर की निरंतरता गेंद के बिना उसकी गतिविधियों से शुरू होती है। ऑफ-द-बॉल मूवमेंट और प्रेसिंग बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि फॉरवर्ड ही टीम की पहली रक्षापंक्ति होते हैं।
गेंद हासिल करने के बाद अन्य फॉरवर्ड खिलाड़ियों के साथ तालमेल बनाना और फिर आक्रमण को गोल, शॉट या पेनल्टी कॉर्नर में बदलना हमारी जिम्मेदारी होती है। मानसिक मजबूती पर उन्होंने कहा, डी के भीतर संयम अभ्यास से आता है। यदि आप प्रशिक्षण में मेहनत नहीं करेंगे तो दबाव की स्थिति में सही निर्णय नहीं ले पाएंगे।
हम ध्यान (मेडिटेशन) और अनुभव के जरिए मानसिक रूप से भी खुद को मजबूत बनाते हैं। जितना अधिक खेलेंगे, उतना ही कठिन परिस्थितियों में शांत रह पाएंगे।
एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 का आयोजन 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में होगा। भारत को पूल-डी में रखा गया है, जहां वह अपने अभियान की शुरुआत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ करेगा। इसके बाद भारतीय टीम इंग्लैंड और चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से भिड़ेगी।



