‘वंदे मातरम’ का अपमान अब होगा संज्ञेय अपराध: राज्यसभा से राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक को मिली मंजूरी

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा ने आज ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में एक बेहद अहम संशोधन को अपनी मंजूरी दे दी। इस नए संशोधन के पारित होने के बाद, अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का किसी भी प्रकार से अपमान करना, उसे गाने से रोकना या सार्वजनिक स्थानों पर इसके प्रति असम्मान प्रकट करना एक संज्ञेय और आपराधिक कृत्य माना जाएगा।
इससे पहले इस अधिनियम के तहत मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) और भारतीय संविधान के अपमान को ही कवर किया जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आई थीं जहां कुछ समूहों या व्यक्तियों द्वारा राष्ट्रीय गीत को लेकर विवाद उत्पन्न किए गए। इसी पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय द्वारा इस संशोधन को संसद के पटल पर रखा गया था।
सदन में बिल पेश करते हुए सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। इसका अपमान पूरे राष्ट्र का अपमान है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इस कृत्य में शामिल पाया जाता है, तो उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। हालांकि, विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस बिल को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए, लेकिन अंततः व्यापक समर्थन के साथ यह बिल उच्च सदन से पास हो गया।

