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भारत के लिए ऐतिहासिक पल: 28 साल के लंबे इंतजार के बाद ‘सारनाथ’ को मिला यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) का दर्जा

इंडियन व्यू टीम/ वाराणसी / नई दिल्ली / पेरिस: भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) ने वैश्विक पटल पर एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। 28 साल के लंबे और कठिन इंतजार के बाद, आखिरकार भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली—वाराणसी स्थित ‘सारनाथ’ (Sarnath)—को यूनेस्को (UNESCO) ने आधिकारिक रूप से ‘विश्व धरोहर स्थल’ (World Heritage Site) की सूची में शामिल कर लिया है। यह घोषणा पेरिस में चल रहे यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र के दौरान की गई।

बौद्ध सर्किट (Buddhist Circuit) का मुकुट

सारनाथ वह पवित्र स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश (धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त) दिया था। यह स्थल दुनिया भर के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों (दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान, श्रीलंका) के लिए असीम आस्था का केंद्र है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, 1998 में पहली बार सारनाथ को यूनेस्को की अस्थायी सूची (Tentative List) में डाला गया था। इसके बाद से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने धमेख स्तूप (Dhamek Stupa) और अशोक स्तंभ की प्राचीनता और संरक्षण के पुख्ता डोजियर तैयार कर यूनेस्को को सौंपे थे।

पर्यटन और संरक्षण को मिलेगा भारी बूम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया है। इंडियन व्यू टीम के अनुसार, यूनेस्को का टैग मिलने से अब सारनाथ के ऐतिहासिक भग्नावशेषों (Ruins) के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और तकनीकी सहायता प्राप्त होगी। इसके साथ ही, वाराणसी और पूरे ‘बौद्ध सर्किट’ में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन (International Tourism) में भारी उछाल आने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बड़े पैमाने पर गति मिलेगी।

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