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छात्रों के कड़े विरोध और जंतर-मंतर पर जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से दिया इस्तीफा

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषकर NEET-UG) में व्यापक धांधली के खिलाफ पिछले एक महीने से चल रहा छात्र आंदोलन आखिरकार एक बड़े सियासी अंजाम तक पहुंच गया है। छात्रों के कड़े विरोध, विपक्ष के भारी दबाव और संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राष्ट्रपति भवन ने भी आधिकारिक तौर पर उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।

नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छोड़ा पद

सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की विफलताओं और देश के लाखों छात्रों के बीच पैदा हुए अविश्वास की नैतिक जिम्मेदारी (Moral Responsibility) लेते हुए वे अपने पद से हट रहे हैं। बीते कुछ हफ्तों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले छात्रों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी एकमात्र मांग बना लिया था, जिसके लिए उन्होंने ‘हर जिला, एक दिन, एक मांग’ का राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ रखा था।

सरकार का ‘डैमेज कंट्रोल’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा मोदी सरकार के लिए एक बड़ा ‘डैमेज कंट्रोल’ (Damage Control) कदम है। छात्रों के गुस्से और विपक्ष द्वारा संसद को पूरी तरह से ठप कर दिए जाने के बाद, सरकार के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न केवल छात्रों के उग्र प्रदर्शन को शांत करने की एक कोशिश है, बल्कि यह संदेश देने का भी प्रयास है कि सरकार में किसी भी स्तर पर जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि नया शिक्षा मंत्री इस संकट से कैसे निपटेगा।

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