एनडीए (NDA) की अहम बैठक में पीएम मोदी ने परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों पर सरकार की सख्त कार्रवाई और जवाबदेही का पुरजोर बचाव किया

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के बीच नीट-यूजी (NEET-UG) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की एक अहम बैठक को संबोधित किया। इस बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्ष के सभी आरोपों का आक्रामक तरीके से जवाब देते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदमों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाएगा।
‘हम समस्याओं से भागते नहीं, उनका समाधान करते हैं’
एनडीए सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर केवल राजनीति कर रहा है, जबकि हमारी सरकार ने बिना समय गंवाए कड़े फैसले लिए हैं। हमने देश के इतिहास का सबसे सख्त ‘एंटी-पेपर लीक कानून’ (सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम) लागू किया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हम समस्याओं से मुंह नहीं चुराते, बल्कि उन्हें जड़ से खत्म करते हैं।”
सीबीआई (CBI) जांच और त्वरित गिरफ्तारियां
प्रधानमंत्री ने सांसदों को बताया कि सरकार ने नीट पेपर लीक मामले की जांच देश की सबसे प्रमुख एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। अब तक कई राज्यों से मास्टरमाइंड्स और शिक्षा माफियाओं की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की उच्च-स्तरीय समीक्षा के लिए इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेष पैनल का गठन किया गया है, जो परीक्षा प्रणाली को फूलप्रूफ (Foolproof) बनाने के लिए अपनी सिफारिशें दे रहा है।
सांसदों को दिया जमीनी स्तर पर जाने का निर्देश
प्रधानमंत्री ने एनडीए के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को निर्देश दिया कि वे विपक्ष के दुष्प्रचार का पुरजोर जवाब दें। उन्होंने कहा कि सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में जाएं और युवाओं तथा उनके अभिभावकों से संवाद कर उन्हें बताएं कि सरकार उनके अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठा रही है। सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह शिक्षा के मुद्दे पर बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर आकर पारदर्शी तरीके से सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

