मॉनसून 2026: असम और उत्तरी पश्चिम बंगाल में बाढ़ की स्थिति गंभीर; सेना और एनडीआरएफ की अतिरिक्त कंपनियां तैनात

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ गुवाहाटी / सिलीगुड़ी: मॉनसून 2026 ने पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर असम और उत्तरी पश्चिम बंगाल में भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र, तीस्ता और इनकी सहायक नदियां खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से भारतीय सेना की कई टुकड़ियों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की अतिरिक्त कंपनियों को राहत और बचाव कार्य के लिए तैनात कर दिया है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 33 में से 24 जिले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जिससे 20 लाख से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। धुबरी, बारपेटा, नलबाड़ी और कामरूप जैसे जिले सबसे ज्यादा जलमग्न हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूब चुकी है और खरीफ की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) का भी लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी में डूब गया है, जिससे गैंडों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जाने के लिए वन विभाग की टीमें दिन-रात मशक्कत कर रही हैं।
दूसरी ओर, उत्तरी पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग जिलों में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। तीस्ता नदी के उफान के कारण कई महत्वपूर्ण पुल और सड़कें बह गई हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह टूट गया है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslide) की घटनाओं ने बचाव कार्यों को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। दार्जिलिंग-सिक्किम हाईवे जगह-जगह मलबा गिरने से बाधित हो गया है।
प्रशासन ने युद्ध स्तर पर राहत शिविर (Relief Camps) स्थापित किए हैं, जहां लाखों विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। सेना और एनडीआरएफ के जवान मोटर बोट्स और हेलीकॉप्टरों की मदद से छतों और पेड़ों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। वायुसेना (IAF) के हेलीकॉप्टरों द्वारा बाढ़ में फंसे दूरदराज के इलाकों में खाने के पैकेट, दवाइयां और पीने का साफ पानी एयर-ड्रॉप किया जा रहा है।
मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों तक इन क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है, जिससे स्थिति के और बिगड़ने की आशंका है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) लगातार दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के संपर्क में है और केंद्र की ओर से हर संभव वित्तीय और रसद सहायता का आश्वासन दिया गया है। बाढ़ की यह विभीषिका एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान की ओर गंभीर इशारा कर रही है।

