सबसे बड़े धोखेबाज डेवलपर्स में से एक’, पार्श्वनाथ बिल्डर्स को ‘सुप्रीम’ फटकार, कंपनी के बैंक अकाउंट भी फ्रीज

नई दिल्ली (अभिषेक सिंह) : गुरुग्राम में ‘पार्श्वनाथ एक्सोटिका’ प्रोजेक्ट में फ्लैट न मिलने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ बिल्डर ग्रुप की दो कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। साथ ही, शीर्ष अदालत ने कंपनियों, उनके MD और डायरेक्टरों के बैंक अकाउंट फ्रीज करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता दंपत्ति रीता और लोकेश टिक्कू की ओर से पेश हुईं सीनियर वकील प्रिया हिंगोरानी ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच को अहम जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कैसे बिल्डरों- पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स और पार्श्वनाथ डेवलपर्स- ने फ्लैट देने में देरी के लिए मुआवजा देने के हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) के आदेशों की खुलेआम अनदेखी की और गिरफ्तारी से बचते रहे। हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल लोकेश सिन्हल से बेंच ने पूछा कि जब बिल्डर इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा है, तो सरकार उसका बिल्डर लाइसेंस क्यों बढ़ा रही है।
सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने लगाई फटकार
CJI की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि यह सबसे बड़े धोखेबाज डेवलपर्स में से एक है, जिसने एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया है और घर खरीदने वालों को मझधार में छोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर-खरीदार समझौते के अनुसार फरवरी 2013 में पूरी तरह तैयार फ्लैट का कब्जा दिया जाना था, लेकिन प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है, जिससे याचिकाकर्ताओं को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
पार्श्वनाथ डेवलपर्स की संपत्ति बेचने पर पूरी तरह रोक का आदेश’
सर्वोच्च कोर्ट ने कहा कि HRERA के कड़े आदेशों के बावजूद बिल्डर का कार्रवाई से बच निकलना पहली नजर में यह दिखाता है कि कलेक्टर और स्थानीय पुलिस या तो बिल्डर के साथ मिली हुई है या अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रही है। कोर्ट ने कहा कि बिल्डर से 1.8 करोड़ रुपये वसूलने का HRERA का आदेश लागू नहीं हुआ है और दंपत्ति को एक पैसा भी वापस नहीं मिला है।



