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प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट में चैंबर आवंटन विवाद सुलझने के आसार, जजों की समिति और बार एसोसिएशन के बीच पहले दौर की वार्ता रही सकारात्मक

विवेक ओझा/  प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट में नवनिर्मित चैंबरों के आवंटन नियमों को लेकर अधिवक्ताओं और हाई कोर्ट प्रशासन के बीच पिछले कई दिनों से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म होने की कगार पर है। मुख्य न्यायाधीश द्वारा विवाद को सुलझाने के लिए गठित की गई वरिष्ठ जजों की विशेष समिति और बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच कल हुई पहले दौर की वार्ता बेहद सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। इस बातचीत के बाद अब यह प्रबल संभावना बन गई है कि जल्द ही एक नए और सर्वमान्य ‘ड्राफ्ट’ (Draft) पर मुहर लग जाएगी और अदालत में कामकाज पूरी तरह सामान्य हो जाएगा।

क्या-क्या हुए समझौते?

बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, समिति ने अधिवक्ताओं की उन सभी आपत्तियों को गंभीरता से सुना, जो नए आवंटन नियमों में रखी गई थीं।
1. सिक्योरिटी डिपॉजिट में कमी: अधिवक्ताओं का सबसे बड़ा विरोध चैंबर के लिए तय की गई भारी-भरकम सिक्योरिटी फीस को लेकर था। जजों की समिति ने इस फीस को तर्कसंगत बनाने और विशेष रूप से युवा व जूनियर वकीलों के लिए इसे किस्तों (Installments) में जमा करने की छूट देने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है।
2. वरिष्ठता (Seniority) का सम्मान: आवंटन में पुराने और लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए एक ‘सीनियरिटी कोटा’ निर्धारित करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक चर्चा हुई है।
3. पारदर्शी प्रक्रिया: समिति ने आश्वस्त किया है कि चैंबर आवंटन की पूरी प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम और पूरी तरह से पारदर्शी डिजिटल माध्यम से होगी, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

हड़ताल वापसी की उम्मीदें

इस सकारात्मक वार्ता के बाद हाई कोर्ट परिसर में तनाव काफी हद तक कम हो गया है। हालांकि बार एसोसिएशन ने अभी तक आधिकारिक रूप से हड़ताल वापस लेने की घोषणा नहीं की है, लेकिन आज शाम तक कार्यकारिणी की बैठक के बाद कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। वकीलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक नया संशोधित ड्राफ्ट लिखित रूप में जारी नहीं हो जाता, तब तक वे सतर्क रहेंगे, लेकिन जजों के सकारात्मक रुख से वे संतुष्ट हैं।

फरियादियों को मिलेगी राहत

चैंबर आवंटन के इस विवाद के कारण पिछले कुछ दिनों से हाई कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही थी, जिससे दूर-दराज से आने वाले फरियादियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस विवाद के सुलझने से न्यायपालिका और बार (Bar and Bench) के बीच संबंध फिर से मजबूत होंगे और लंबित मुकदमों की सुनवाई में तेजी आएगी। हाई कोर्ट प्रशासन जल्द ही नए आवंटन नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकता है।

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