राम मंदिर दान विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन: केंद्र सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी, 4 हफ्ते में तलब की विस्तृत वित्तीय रिपोर्ट

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं और दान में हेराफेरी के आरोपों पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कल (7 जुलाई) मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बहुचर्चित मामले में दाखिल कई जनहित याचिकाओं (PILs) पर एक साथ सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और मंदिर ट्रस्ट को औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि 4 सप्ताह के भीतर ट्रस्ट की पूरी कार्यप्रणाली और वित्तीय लेन-देन की एक विस्तृत और हलफनामा युक्त रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
क्या था याचिकाओं में?
सुप्रीम कोर्ट में ये जनहित याचिकाएं कई आरटीआई कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और कुछ राजनीतिक हस्तियों द्वारा दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में जोरदार दलील देते हुए कहा कि राम मंदिर का निर्माण करोड़ों देशवासियों की आस्था और उनके द्वारा दिए गए हजारों करोड़ रुपये के दान (सार्वजनिक धन) से हो रहा है। ऐसे में हाल ही में सामने आए दानपात्रों से नकदी गायब होने, फर्जी रसीदों और पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रम बेहद गंभीर हैं। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की सीएजी (CAG) या अदालत द्वारा नियुक्त किसी स्वतंत्र एसआईटी (SIT) से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक धन की शुचिता और जवाबदेही (Accountability) को लेकर कई अहम टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा, “किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक ट्रस्ट में पारदर्शिता बुनियादी शर्त है। आस्था के नाम पर दिए गए एक-एक रुपये का हिसाब स्पष्ट होना चाहिए।” अदालत ने हालांकि जांच एजेंसियों को तुरंत दखल देने का आदेश नहीं दिया, लेकिन केंद्र सरकार और ट्रस्ट से यह जानना चाहा कि ऑडिट की मौजूदा व्यवस्था क्या है और हालिया विवादों से निपटने के लिए ट्रस्ट ने क्या आंतरिक कदम उठाए हैं।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस ने ट्रस्ट और सरकार दोनों पर दबाव काफी बढ़ा दिया है। 4 सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या अदालत ऑडिट के लिए कोई विशेष समिति बनाएगी या ट्रस्ट की मौजूदा आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट को पर्याप्त मानेगी। इस बीच, कानूनी जानकारों का मानना है कि इस अदालती हस्तक्षेप के बाद ट्रस्ट को अपनी डिजिटल दान व्यवस्था और लेखा-जोखा प्रणाली को और अधिक सख्त तथा पारदर्शी बनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। देश भर के रामभक्तों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।



