राम मंदिर दान विवाद: ऑडिट और न्यायिक जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, पूरे देश की टिकीं नजरें

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान प्रबंधन में कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत के सामने एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे और पुलिस जांच के बीच, सुप्रीम कोर्ट आज (7 जुलाई) उन कई अहम याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने जा रहा है, जिनमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूरे वित्त और दान राशि के स्वतंत्र ऑडिट (Independent Audit) की मांग की गई है। इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई पर देश भर के करोड़ों रामभक्तों, राजनीतिक दलों और मीडिया की नजरें टिकी हुई हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में ये याचिकाएं कई सामाजिक संगठनों, आरटीआई कार्यकर्ताओं और कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि राम मंदिर के लिए आम जनता ने जो हजारों करोड़ रुपये का चंदा दिया है, वह एक सार्वजनिक संपत्ति (Public Trust) है, इसलिए इसमें पूरी तरह से पारदर्शिता होनी चाहिए।
याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट से मुख्य रूप से तीन दिशा-निर्देश (Directives) जारी करने की मांग की गई है:
1. कैग (CAG) या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ऑडिट: ट्रस्ट के सभी बैंक खातों, नकद प्राप्तियों और खर्चों का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) या कोर्ट द्वारा नियुक्त किसी विशेष वित्तीय समिति से ऑडिट कराया जाए।
2. सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच: हाल ही में सामने आए संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज की किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे सीबीआई) से फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
3. नई पारदर्शी प्रणाली: भविष्य में मंदिर में आने वाले दान के लिए पूरी तरह से डिजिटल और ‘टेम्पर-प्रूफ’ (Tamper-proof) व्यवस्था बनाई जाए।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के ही 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा किया गया था, इसलिए अदालत इस मामले को बेहद गंभीरता से ले सकती है। हालांकि, ट्रस्ट से जुड़े वकीलों का तर्क है कि वे पहले से ही एक आंतरिक जांच कर रहे हैं और उनके खाते चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा ऑडिट किए जाते हैं, इसलिए अदालत के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। आज की सुनवाई यह तय करेगी कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था भविष्य में किसके प्रति जवाबदेह होगी।



