महाराष्ट्र: आरटीआई (RTI) नियमों में विवादित बदलावों पर तत्काल रोक, अन्ना हजारे की चेतावनी के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस का बड़ा फैसला

पल्लवी श्रीवास्तव: पारदर्शिता और सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उठा बड़ा विवाद फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा आरटीआई नियमों में किए गए हालिया विवादित बदलावों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह महत्वपूर्ण फैसला प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा इन बदलावों के खिलाफ आमरण अनशन (Hunger Strike) की चेतावनी दिए जाने के कुछ ही समय बाद आया है।
क्या था पूरा विवाद?
हाल ही में राज्य प्रशासन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया और नियमों में कुछ संशोधन किए थे। नागरिक समाज (Civil Society) और आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इन नए बदलावों से:
* आम नागरिकों के लिए सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल और महंगी हो जाएगी।
* यह सरकारी कामकाज में जवाबदेही को कम करेगा।
* ये संशोधन आरटीआई अधिनियम की मूल भावना (पारदर्शिता) को पूरी तरह से कमजोर कर देंगे।
अन्ना हजारे का अल्टीमेटम और सरकार का यू-टर्न
भारत में आरटीआई कानून को लागू करवाने और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले अन्ना हजारे ने इन संशोधनों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया था कि यदि इन “लोकतंत्र विरोधी” बदलावों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो वह जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए अनशन पर बैठेंगे।
अन्ना हजारे की इस कड़ी चेतावनी के बाद, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत मामले में हस्तक्षेप किया। स्थिति की संवेदनशीलता को समझते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने आदेश जारी किया कि नए नियमों के क्रियान्वयन (Implementation) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा रही है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि नागरिक संगठनों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा करके इन नियमों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
* RTI Act 2005: यह कानून नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार देता है।
* संवैधानिक आधार: सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों के अनुसार, सूचना का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) का ही अंतर्निहित हिस्सा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह त्वरित निर्णय यह दर्शाता है कि एक जीवंत लोकतंत्र में जागरूक नागरिक समाज और जनआंदोलनों का दबाव कितना अहम होता है। अन्ना हजारे के हस्तक्षेप ने पूरे देश में एक बार फिर यह कड़ा संदेश दिया है कि आम आदमी के सबसे बड़े हथियार—सूचना के अधिकार (RTI)—के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



