भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का नया शिखर: 16वें वार्षिक सम्मेलन के मायने

विवेक ओझा: हिंद महासागर से लेकर इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र की भू-राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी घटनाक्रम सामने आया है। 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की नवनियुक्त प्रधानमंत्री सनई ताकाइची (Sanae Takaichi) ने मुलाकात की। दोनों वैश्विक नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए एक बेहद मजबूत ‘संयुक्त बयान’ जारी किया है। यह शिखर सम्मेलन न केवल दोनों देशों की पारंपरिक और सांस्कृतिक मित्रता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक भी है।
रक्षा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा (Defense & Regional Security)
इस शिखर सम्मेलन का सबसे मुख्य आकर्षण रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार रहा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘मुक्त, खुला और समावेशी’ (Free and Open Indo-Pacific) माहौल बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास और उन्नत सुरक्षा साझेदारी की घोषणा की। क्वाड (QUAD) के दो सबसे मजबूत स्तंभ होने के नाते, भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) और आतंकवाद विरोधी अभियानों में आपसी तालमेल को और सख्त करने पर सहमति जताई। यह सहयोग पश्चिमी प्रशांत महासागर से लेकर हिंद महासागर तक फैले व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत गारंटी बनेगा।
आर्थिक साझेदारी: 10 ट्रिलियन येन का मेगा विजन (Economic Ties)
आर्थिक मोर्चे पर इस सम्मेलन ने एक नया इतिहास रचा है। भारत और जापान के बीच अगले दशक (वर्ष 2036 तक) में भारत के भीतर 10 ट्रिलियन येन (जापानी मुद्रा) के भारी-भरकम निवेश को लेकर एक ऐतिहासिक सहमति बनी है।
* इन्फ्रास्ट्रक्चर और बुलेट ट्रेन: यह जापानी निवेश भारत में चल रहे मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और अहमदाबाद-मुंबई व प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी जैसी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजनाओं को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।
* सप्लाई चेन रेजिलिएंस: दोनों देशों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को और अधिक लचीला और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया, ताकि किसी भी वैश्विक संकट के दौरान व्यापारिक निर्भरता किसी एक देश पर न रहे।
तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग (Technology & Innovation)
21वीं सदी तकनीक की सदी है, और जापान को इस क्षेत्र का वैश्विक लीडर माना जाता है। इस साझा बयान में सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 6G दूरसंचार तकनीक, और क्लीन एनर्जी (ग्रीन हाइड्रोजन) के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और विकास (R&D) पर विशेष बल दिया गया है। भारत के विशाल कुशल वर्कफोर्स (इंजीनियरों और शोधकर्ताओं) और जापान की अत्याधुनिक तकनीक का यह मिलन दोनों देशों को ग्लोबल टेक हब के रूप में स्थापित करेगा।
निष्कर्ष
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के चश्मे से देखें तो विवेक ओझा के विश्लेषण के अनुसार, जापान में सत्ता परिवर्तन और प्रधानमंत्री सनई ताकाइची के पद संभालने के बाद भारत के साथ हुआ यह पहला शिखर सम्मेलन यह साबित करता है कि टोक्यो की विदेश नीति में भारत का स्थान कितना केंद्रीय है। 19 ऐतिहासिक समझौतों और 10 ट्रिलियन येन के निवेश के इस रोडमैप ने यह साफ कर दिया है कि भारत-जापान की यह ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ आने वाले समय में न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देने में सक्षम है। यह ग्लोबल साउथ और विकसित राष्ट्रों के बीच सहयोग का एक आदर्श मॉडल है।



