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NEET पेपर लीक विवाद: जंतर-मंतर पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

अभिषेक सिंह: देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर सामने आई तकनीकी अनियमितताओं के खिलाफ देश भर के छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा अब एक बड़े जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसी कड़ी में, लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और प्रतिष्ठित जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर अनशन शुरू कर दिया है। उनकी स्पष्ट और मुख्य मांग है कि इन अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

छात्रों के भविष्य और देश की साख का सवाल

सोनम वांगचुक, जिन्हें आमतौर पर लद्दाख के पर्यावरण और वहां के नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए जाना जाता है, का इस आंदोलन में कूदना यह दर्शाता है कि नीट (NEET) का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं रह गया है। जंतर-मंतर पर अनशन स्थल से मीडिया को संबोधित करते हुए वांगचुक ने कहा कि जब देश की सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण परीक्षा की शुचिता ही दांव पर लग जाए, तो यह पूरे देश की साख का सवाल बन जाता है।

> “जब हमारे देश के होनहार युवाओं का व्यवस्था और परीक्षाओं से भरोसा उठने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि नींव में कहीं गहरी दरार है। हम अपने बच्चों के भविष्य को चंद भ्रष्ट अधिकारियों और पेपर लीक माफियाओं के हाथों में खिलौना बनते नहीं देख सकते।” — सोनम वांगचुक

आंदोलन की मुख्य मांगें

अनशन स्थल पर मौजूद छात्रों, डॉक्टरों और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच अभिषेक सिंह की इस रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

* शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: परीक्षा के आयोजन में हुई इतनी बड़ी विफलता और बार-बार होने वाले पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री पद छोड़ें।
* सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच: इस पूरे घोटाले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी के बजाय सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति द्वारा की जाए।
* परीक्षा प्रणाली में पूर्ण सुधार: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज की समीक्षा हो और पूरी तरह से पारदर्शी व फुल-प्रूफ डिजिटल और भौतिक परीक्षा ढांचा तैयार किया जाए।

राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के इस अनशन ने सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ा दिया है। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने वांगचुक के इस कदम का समर्थन किया है और संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। वहीं दूसरी ओर, देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों नीट (NEET) अभ्यर्थी भी जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए हैं, जिनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम पर गहराई से नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक के इस सत्याग्रह ने युवाओं की आवाज को एक नई नैतिक ताकत दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस बढ़ते जन-असंतोष और जंतर-मंतर से उठ रही मांगों पर क्या रुख अपनाती है। लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणालियों में आमूलचूल बदलाव के बिना युवाओं के इस गहरे आक्रोश को शांत कर पाना बेहद मुश्किल होगा।

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