लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट में बड़ा बदलाव: पहली बार की प्रक्रियात्मक गलतियों के लिए ‘सुधार नोटिस तंत्र’ लागू

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और देश भर के छोटे-बड़े व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी मुकदमों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम और बहुप्रतीक्षित कदम उठाया है। सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट (विधिक मापविज्ञान अधिनियम) के तहत पहली बार होने वाले प्रक्रियात्मक उल्लंघनों (Procedural Violations) के लिए ‘सुधार नोटिस तंत्र’ (Improvement Notice Mechanism) की शुरुआत की है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और आम नागरिकों, दोनों के लिए अर्थव्यवस्था और शासन (Governance) के दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
क्या है ‘सुधार नोटिस तंत्र’?
इससे पहले, लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत पैकेजिंग, लेबलिंग या वजन से जुड़ी छोटी-सी तकनीकी या प्रक्रियात्मक गलती होने पर भी सीधे जुर्माना लगाया जाता था या कानूनी कार्रवाई (Prosecution) शुरू कर दी जाती थी।
नए ‘सुधार नोटिस तंत्र’ के लागू होने से अब एक नई व्यवस्था बनेगी:
* गलती सुधारने का मौका: यदि किसी व्यापारी या निर्माता से पहली बार कोई प्रक्रियात्मक चूक होती है (जिसमें कोई धोखाधड़ी का इरादा न हो), तो विभाग सीधे दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय एक ‘सुधार नोटिस’ जारी करेगा।
* तय समय-सीमा: इस नोटिस में गलती को सुधारने के लिए एक निश्चित समय-सीमा (Timeframe) दी जाएगी।
* दंडात्मक कार्रवाई से बचाव: यदि व्यापारी तय समय के भीतर नियमों का पालन सुनिश्चित कर लेता है और अपनी गलती सुधार लेता है, तो उस पर कोई जुर्माना या केस दर्ज नहीं किया जाएगा।
*व्यापारियों और MSME सेक्टर को बड़ी राहत
इस फैसले का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और खुदरा व्यापारियों पर पड़ेगा। अक्सर जानकारी के अभाव में या मानवीय भूल के कारण पैकेज्ड कमोडिटीज (Packaged Commodities) के लेबल पर कोई छोटी सी जानकारी छूट जाने पर इंस्पेक्टर राज का डर बना रहता था। यह कदम ‘डिक्रिमिनलाइजेशन ऑफ माइनर ऑफेंसेस’ (छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने) की सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा है। इससे न केवल उत्पीड़न कम होगा बल्कि बाजार में व्यापारिक विश्वास भी बढ़ेगा।
लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट क्या है?
विधिक मापविज्ञान अधिनियम (Legal Metrology Act), 2009 वह कानून है जो भारत में वजन और माप (Weights and Measures) के मानकों को स्थापित और लागू करता है।
* इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है, ताकि उन्हें सही वजन और माप वाला सामान मिले।
* इसके तहत यह अनिवार्य है कि बाजार में बिकने वाले सभी डिब्बाबंद (Packaged) उत्पादों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP), निर्माण की तिथि, एक्सपायरी डेट, शुद्ध वजन और निर्माता का पता स्पष्ट रूप से लिखा हो।
‘सुधार नोटिस तंत्र’ का यह नया प्रावधान उपभोक्ता संरक्षण और व्यापारिक सहूलियत के बीच एक बेहतरीन संतुलन स्थापित करता है। यह स्पष्ट करता है कि कानून का उद्देश्य सुधार लाना और अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित करना है, न कि केवल दंडित करना। यह कदम देश में एक पारदर्शी और भयमुक्त व्यापारिक माहौल के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।



