खेती-किसानी के लिए बड़ा दिन: मोदी कैबिनेट ने 14 खरीफ फसलों की MSP में की 7 से 10% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी, धान और मक्के के दाम बढ़े

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कल शाम हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के अन्नदाताओं के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार ने आगामी सीजन के लिए धान, रागी और मक्का समेत कुल 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 7% से 10% की भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर लिए गए इस फैसले को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य फसलों के नए दाम और बढ़ोतरी का गणित
इस बार की बढ़ोतरी में सरकार ने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मोटे अनाजों (Millets) और दलहन-तिलहन पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि देश को खाद्य तेलों और दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके:
* धान (Paddy) की कीमतों में सुधार: देश की सबसे मुख्य खरीफ फसल धान के समर्थन मूल्य में इस बार उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इससे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे बड़े धान उत्पादक राज्यों के करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
* मक्का और रागी पर विशेष फोकस: ‘श्री अन्न’ (मोटे अनाज) को बढ़ावा देने के विजन के तहत मक्का, रागी, और बाजरा की एमएसपी में लगभग 9% से 10% तक की सबसे बड़ी प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। यह कदम सूखे से प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
* दलहन और तिलहन को मजबूती: अरहर (तुअर), उड़द और मूंग के साथ-साथ सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल बीजों की एमएसपी में भी भारी इजाफा किया गया है, ताकि किसान नकदी फसलों की तरफ प्रोत्साहित हो सकें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और इनपुट कॉस्ट पर इसका प्रभाव
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसून ने अपनी दस्तक दे दी है और किसान बुवाई की तैयारियों में जुटे हैं। पिछले कुछ समय में बीज, खाद और डीजल की कीमतों के कारण किसानों की ‘इनपुट कॉस्ट’ (खेती की लागत) में बढ़ोतरी देखी जा रही थी।
7% से 10% की यह ऐतिहासिक वृद्धि न केवल किसानों की इस बढ़ी हुई लागत की भरपाई करेगी, बल्कि उनके मुनाफे के मार्जिन को भी सुरक्षित करेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के दाम बढ़ने से ग्रामीण भारत में तरलता (Liquidity) बढ़ेगी, जिससे ट्रैक्टर, टू-व्हीलर और एफएमसीजी (FMCG) जैसे घरेलू बाजारों में मांग में तेजी आएगी।
चुनावी वर्ष में सरकार का बड़ा रणनीतिक कदम
यदि इस फैसले को राजनीतिक चश्मे से देखा जाए, तो साल 2026 के अंत में होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सरकार ने यह बड़ा दांव खेला है। विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे कृषि संकट और ‘रोजगार अधिकार मार्च’ जैसे आंदोलनों के बीच, एमएसपी में इस बढ़ोतरी को सरकार का एक बेहद व्यावहारिक और आक्रामक जवाब माना जा रहा है।
> मुख्य बिंदु: सरकार ने साफ संदेश दिया है कि वह कृषि क्षेत्र को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रख रही है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि राज्य सरकारें और उनकी स्थानीय एजेंसियां मंडियों में इस बढ़ी हुई एमएसपी पर शत-प्रतिशत सरकारी खरीद (Procurement) सुनिश्चित कर पाती हैं या नहीं, क्योंकि असली लाभ तभी किसानों की जेब तक पहुंचेगा।



