‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजा जम्मू: कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था कश्मीर के लिए रवाना

अभिषेक सिंह/ जम्मू | बाबा बर्फानी के दर्शन की बहुप्रतीक्षित और पवित्र ‘अमरनाथ यात्रा 2026’ का आज आधिकारिक तौर पर शंखनाद हो गया है। जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप (Bhagwati Nagar Base Camp) से आज सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पूरे विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं का पहला जत्था कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। जैसे ही यात्रा का काफिला आगे बढ़ा, पूरा बेस कैंप ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।
देश के कोने-कोने से आए शिवभक्तों के चेहरों पर यात्रा को लेकर भारी उत्साह और असीम श्रद्धा देखने को मिल रही है।
भक्ति और उत्साह का अद्भुत नजारा
आज तड़के से ही भगवती नगर बेस कैंप में उत्सव जैसा माहौल था। साधु-संतों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं का हुजूम बाबा बर्फानी के दर्शन की लालसा लिए तैयार था। स्थानीय प्रशासन और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (LG Manoj Sinha) ने हरी झंडी दिखाकर और पूजा-अर्चना कर इस पहले जत्थे को रवाना किया।
इस जत्थे में हजारों तीर्थयात्री शामिल हैं, जो बसों और छोटे वाहनों के भारी-भरकम काफिले में सवार होकर कश्मीर के दो मुख्य बेस कैंपों—पहलगाम (Pahalgam) और बालटाल (Baltal)—की ओर बढ़ रहे हैं।
अभेद्य सुरक्षा घेरा और हाई-टेक निगरानी
अमरनाथ यात्रा की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व और हाई-टेक इंतजाम किए गए हैं:
- थ्री-टियर सिक्योरिटी: काफिले की सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सेना के जवानों का त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा (Three-tier Security) तैयार किया गया है।
- RFID ट्रैकिंग: हर यात्री को अनिवार्य रूप से एक रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग दिया गया है, जिससे कंट्रोल रूम से हर श्रद्धालु की रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
- ड्रोन और स्नाइपर: पूरे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रोन से एरियल सर्विलांस (हवाई निगरानी) की जा रही है और संवेदनशील ऊंचाइयों पर स्नाइपर्स तैनात किए गए हैं।
दो रास्तों से आगे बढ़ेंगे श्रद्धालु
जम्मू से रवाना होने के बाद यह जत्था कश्मीर घाटी पहुंचेगा, जहां से यात्री अपनी सुविधा और रजिस्ट्रेशन के अनुसार दो अलग-अलग मार्गों से पवित्र गुफा की ओर चढ़ाई शुरू करेंगे:
1. पहलगाम (नुनवान) मार्ग: यह 48 किलोमीटर लंबा पारंपरिक मार्ग है, जो थोड़ा लंबा जरूर है लेकिन यहां चढ़ाई अपेक्षाकृत आसान होती है।
2. बालटाल मार्ग: यह 14 किलोमीटर का छोटा लेकिन बेहद खड़ी और दुर्गम चढ़ाई वाला मार्ग है। अधिकतर युवा इसी मार्ग का चयन करते हैं।
कल (27 जून) सुबह ये श्रद्धालु इन दोनों बेस कैंपों से पवित्र गुफा की ओर अपनी पैदल यात्रा शुरू करेंगे।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पुख्ता तैयारियां
मौसम के बदलते मिजाज और ऊंचे पहाड़ों की चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने रास्तों में जगह-जगह ऑक्सीजन बूथ, मेडिकल कैंप और विश्राम स्थल बनाए हैं। इसके अलावा, किसी भी प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) और माउंटेन रेस्क्यू टीमों को क्रिटिकल पॉइंट्स पर तैनात कर दिया गया है। मौसम विभाग (IMD) भी यात्रा मार्ग के लिए लगातार विशेष बुलेटिन जारी कर रहा है।
आस्था के आगे हर चुनौती पस्त
अमरनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकजुटता का सबसे बड़ा प्रतीक है। जम्मू बेस कैंप में मौजूद शिवभक्तों से बात करने पर एक ही बात समझ में आती है—आस्था के आगे मौसम और आतंकवाद का हर खौफ पस्त है। गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के सुदूर इलाकों से आए श्रद्धालु केवल एक ही धुन में रमे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन करने हैं। जम्मू के लोगों द्वारा जगह-जगह लगाए गए लंगर और यात्रियों का स्वागत कश्मीर की उस सूफी और सौहार्दपूर्ण परंपरा को भी जिंदा रखे हुए है, जिस पर पूरा देश गर्व करता है। बाबा के भक्तों का यह सफर सुरक्षित और मंगलमय हो!



