यूपी में कोचिंग सेंटरों पर ‘महा-क्रैकडाउन’: हाई कोर्ट की सख्ती के बाद सभी 75 जिलों में फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू, 120 से अधिक संस्थान सील

राघवेंद्र प्रताप सिंह लखनऊ | राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड (जिसमें 15 छात्रों की जान गई थी) के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट की कड़ी फटकार और निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। शासन के आदेश पर आज सुबह से यूपी के सभी 75 जिलों में एक साथ कोचिंग सेंटरों, लाइब्रेरियों और कमर्शियल बिल्डिंग्स का सघन ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ (Fire Safety Audit) शुरू कर दिया गया है।
प्रशासनिक अमला अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है, जिसका सीधा असर शिक्षा के बड़े गढ़ माने जाने वाले शहरों में देखने को मिल रहा है।
शिक्षा के ‘हब’ बने शहरों में सबसे बड़ी कार्रवाई
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का केंद्र माने जाने वाले शहरों में प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमों ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआती 24 घंटों के भीतर ही लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज में मानकों की अनदेखी करने वाले 120 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया है।
- प्रयागराज (Prayagraj): कटरा, सलोरी और अल्लापुर जैसे इलाकों में बेसमेंट में चल रही दर्जनों लाइब्रेरियों और कोचिंग सेंटरों को खाली करवाकर नोटिस चस्पा कर दिया गया है।
- लखनऊ (Lucknow): अलीगंज हादसे से सबक लेते हुए कपूरथला, हजरतगंज और आलमबाग में बिना ‘फायर NOC’ चल रहे 50 से अधिक संस्थानों पर ताला जड़ दिया गया है।
- कानपुर (Kanpur): काकादेव कोचिंग मंडी में प्रशासन की तीन टीमों ने सघन चेकिंग अभियान चलाया और आपातकालीन रास्ते (Emergency Exits) न होने पर भारी जुर्माना लगाया।
किन मानकों पर हो रही है जांच?
फायर विभाग और विकास प्राधिकरण (जैसे LDA, PDA) की संयुक्त टीमें मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर फोकस कर रही हैं:
- अवैध बेसमेंट का इस्तेमाल: क्या बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के बजाय क्लासरूम या लाइब्रेरी के रूप में हो रहा है? (बेसमेंट में एक ही रास्ता होने पर इसे तुरंत सील किया जा रहा है)।
- फायर एनओसी और उपकरण: बिल्डिंग के पास वैध ‘फायर एनओसी’ (Fire NOC) है या नहीं? फायर एक्सटिंग्विशर चालू हालत में हैं या केवल शो-पीस बने हैं?
- आपातकालीन निकास (Emergency Exit): आग लगने की स्थिति में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए दूसरी सीढ़ी या पर्याप्त वेंटिलेशन है या नहीं।
छात्रों की पढ़ाई पर असर और ऑनलाइन क्लासेज का निर्देश
इस अचानक हुई कार्रवाई से उन हजारों प्रतियोगी छात्रों में थोड़ी अफरा-तफरी का माहौल है, जिनकी आगामी हफ्तों में परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। हालांकि, छात्रों का कहना है कि पढ़ाई से ज्यादा उनकी जान कीमती है।
जिलाधिकारियों ने सभी सील किए गए कोचिंग संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जब तक वे मानकों को पूरा करके दोबारा अनुमति नहीं ले लेते, तब तक छात्रों का सिलेबस न रोकें और उनके लिए अनिवार्य रूप से ‘ऑनलाइन क्लासेज’ (Online Classes) की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
कब सुधरेगा सिस्टम?
- अलीगंज की हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर हमारे सिस्टम की पोल खोल दी है। सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि प्रशासन हमेशा किसी बड़े हादसे और मासूमों की मौत के बाद ही नींद से क्यों जागता है? प्रयागराज और लखनऊ की संकरी गलियों में बिना वेंटिलेशन और सुरक्षा इंतजामों के सैकड़ों कोचिंग सेंटर सालों से खुलेआम चल रहे हैं, क्या स्थानीय अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी?
- हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ यह ‘महा-अभियान’ यकीनन एक सराहनीय कदम है, लेकिन अगर यह कुछ दिनों बाद सिर्फ ‘खानापूर्ति’ (Formality) बनकर रह जाता है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाना नामुमकिन होगा। अब यूपी सरकार की असली परीक्षा यह है कि वह कोचिंग माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ को तोड़कर इस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को कितने लंबे समय तक जमीन पर लागू रख पाती है।



