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आरिफ और स्टैनजिन बने आईओसी की नई 10,000 डॉलर अनुदान योजना के पहले भारतीय लाभार्थी

स्कीइंग खिलाड़ी आरिफ मोहम्मद खान और स्टैनजिन लुंडुप अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की ओर से ओलंपियनों को दिए जाने वाले 10,000 डॉलर के अनुदान को प्राप्त करने वाले शुरुआती भारतीय खिलाड़ियों में शामिल होंगे। दोनों ने इस वर्ष मिलानो-कोर्टिना शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, जिसके साथ इस नई योजना की शुरुआत हुई।

यह अनुदान आईओसी के उस सौ वर्ष से अधिक पुराने सिद्धांत में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसके तहत ओलंपिक अभियान में ‘एमेच्योर’ (शौकिया तौर पर खेलने) की भावना को महत्व देते हुए खिलाड़ियों को किसी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं दिया जाता था।

यह पहल आईओसी के ‘फिट फॉर द फ्यूचर’ रणनीतिक ढांचे का हिस्सा है। इसका उद्देश्य उन खिलाड़ियों की सहायता के लिए नए और पूरक तरीके विकसित करना है, जो ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करते हैं और किसी भी डोपिंग उल्लंघन से दूर रहते हैं।

साभार : गूगल

आईओसी अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने इसे इनामी राशि कहने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि यह एक सहायक प्रणाली है। जल्द शुरू होने वाली इस योजना के तहत आवेदनों की जांच के बाद इस वर्ष के अंत तक भुगतान शुरू कर दिया जाएगा।

आरिफ ने मिलानो-कोर्टिना में पुरुषों की स्लैलम स्पर्धा में 39वां स्थान हासिल कर भारत के लिए शीतकालीन ओलंपिक इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि 1988 के कैलगरी खेलों में किशोर रत्न रॉय द्वारा बनाए गए भारत के पिछले सर्वश्रेष्ठ परिणाम से 10 स्थान बेहतर रही।

दक्षिण एशियाई शीतकालीन खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके आरिफ ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, “यह अनुदान उस मेहनत और संघर्ष को मान्यता देता है जिससे एक खिलाड़ी ओलंपिक की तैयारी के दौरान गुजरता है। इससे खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और 10,000 डॉलर (करीब 9.43 लाख रुपये) की राशि का वे अपने विकास के लिए उपयोग कर सकेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “असल में बात सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के प्रति देखभाल और सम्मान की है। आईओसी यह दिखा रहा है कि उसे खिलाड़ियों के सफर की परवाह है, जो बेहद सकारात्मक बात है।”

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग निवासी आरिफ ने कहा, “यह ओलंपिक चक्र के दौरान की गई कड़ी मेहनत के लिए दिया जाने वाला अनुदान है। वे उस प्रयास को पहचान रहे हैं जो एक ओलंपियन बनने में लगता है। खिलाड़ियों के लिए यह एक बहुत बड़ा क्षण है।” स्टैनजिन लुंडुप के लिए उनका पहला शीतकालीन ओलंपिक अनुभव अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। वह पुरुषों की 10 किलोमीटर फ्रीस्टाइल क्रॉस-कंट्री स्कीइंग स्पर्धा में 104वें स्थान पर रहे।

स्टैनजिन का चयन उस समय विवादों में आ गया था जब बेहतर रैंकिंग वाले मंजीत कुमार ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा उनके चयन को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने चयन प्रक्रिया को “स्पष्ट रूप से मनमानी और अनुचित” करार दिया था।

हालांकि, आईओए ने अदालत को बताया कि खिलाड़ियों के नाम भेजने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और इसलिए टीम में कोई बदलाव संभव नहीं है। इसके बाद खेल मंत्रालय ने तकनीकी पहलुओं पर विचार करते हुए अंततः स्टैनजिन को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दे दी।

जहां उद्घाटन समारोह में आरिफ को भारत का ध्वजवाहक बनने का सम्मान मिला था, वहीं लद्दाख के सेना के जवान स्टैनजिन को खेलों के समापन समारोह में देश का ध्वजवाहक चुना गया। आईओसी के खिलाड़ी आयोग के अध्यक्ष और बास्केटबॉल के दिग्गज पाउ गैसोल ने बताया कि खिलाड़ियों के लिए आवेदन प्रक्रिया तैयार की जा रही है।

इस कोष की घोषणा करते हुए गैसोल ने कहा, “यह अनुदान हर ओलंपियन को मिलेगा। सिर्फ पदक विजेताओं को नहीं, सिर्फ कुछ चुनिंदा देशों के खिलाड़ियों को नहीं, बल्कि हर ओलंपियन को। क्योंकि भले ही प्रत्येक खिलाड़ी का सफर अलग हो, लेकिन ओलंपिक मंच तक पहुंचने के लिए हर खिलाड़ी ने त्याग और समर्पण किया है।”

इस कोष की कुल सीमा प्रत्येक ओलंपिक चक्र के लिए 14 करोड़ डॉलर निर्धारित की गई है। गैसोल ने कोवेंट्री की बात दोहराते हुए कहा, “यह कोई इनामी राशि नहीं है। यह ओलंपियन बनने की यात्रा और उसके लिए आवश्यक प्रतिबद्धता को सम्मान देने का प्रयास है।”

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