‘अग्निवीर’ योजना में बड़े बदलाव की तैयारी: चौतरफा दबाव के बीच रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम, स्थायीकरण (Retention) को 25% से बढ़ाकर 50% करने पर गंभीर मंथन

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली | भारतीय सेना की भर्ती प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव के दावे के साथ शुरू की गई ‘अग्निपथ योजना’ (Agnipath Scheme) में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव (Policy Overhaul) होने जा रहा है। देशव्यापी राजनीतिक विरोध, सहयोगी दलों के बढ़ते दबाव और रक्षा विशेषज्ञों के आंतरिक फीडबैक को देखते हुए रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) इस योजना की सबसे बड़ी कमजोरी को दूर करने की तैयारी में है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सरकार अग्निवीरों के स्थायीकरण (Retention Rate) को मौजूदा 25% से बढ़ाकर 50% करने के प्रस्ताव पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है।
इस संभावित संशोधन को 2026 के इस राजनीतिक वर्ष में सरकार का एक बड़ा रणनीतिक ‘डैमेज कंट्रोल’ माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य युवाओं की नाराजगी को दूर करना और सेना की युद्धक क्षमता (Combat Readiness) दोनों के बीच सटीक संतुलन बनाना है।
आखिर क्यों पीछे हटने को मजबूर हुई सरकार?
जून 2022 में जब इस योजना को लॉन्च किया गया था, तब से ही यह विपक्ष के निशाने पर रही है। हाल ही में विपक्ष द्वारा देश भर में चलाए जा रहे ‘रोजगार अधिकार मार्च’ ने इस मुद्दे को दोबारा युवाओं के बीच हवा दे दी है। इसके अलावा, सरकार के भीतर मौजूद कुछ प्रमुख घटक दलों (Alliance Partners) ने भी आंतरिक बैठकों में इस योजना की समीक्षा करने की खुलेआम मांग की थी।
रक्षा मंत्रालय के आंतरिक सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आई थी कि 4 साल की अल्पकालिक नौकरी और उसके बाद 75% युवाओं के बाहर होने से ग्रामीण इलाकों के युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण कम हो रहा था। इसी ‘असुरक्षा की भावना’ को खत्म करने के लिए इस नीतिगत सर्जरी की रूपरेखा तैयार की गई है।
क्या होंगे संभावित बदलाव? (मौजूदा बनाम प्रस्तावित व्यवस्था)
रक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार किए जा रहे नए ड्राफ्ट में केवल स्थायीकरण की समयसीमा ही नहीं, बल्कि सेवा शर्तों और प्रशिक्षण की अवधि में भी कई महत्वपूर्ण सुधार शामिल किए जा रहे हैं।
नियमित होने के अवसर में दोगुनी बढ़ोतरी:
वर्तमान नियमों के तहत, चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद केवल 25% मेधावी अग्निवीरों को ही सेना में स्थायी रूप से बरकरार (Retain) रखा जाता है। नए प्रस्ताव के तहत इस सीमा को बढ़ाकर 50% करने की तैयारी है, जिससे आधे जवानों को सेना में लंबे समय तक सेवा देने का मौका मिलेगा।
सेवा और प्रशिक्षण की अवधि पर पुनर्विचार:
फिलहाल योजना के तहत सेवा की कुल अवधि 4 वर्ष है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इसे बढ़ाकर 4 से 5 वर्ष करने पर मंथन कर रही है। इसके साथ ही, 6 महीने की मौजूदा बेसिक ट्रेनिंग को भी कुछ विशेष तकनीकी पदों (Technical Trades) के लिए बढ़ाकर 6 से 9 महीने किया जा सकता है।
भविष्य की आर्थिक और करियर सुरक्षा:
अभी जो जवान बाहर होते हैं, उन्हें 4 साल बाद लगभग 12 लाख रुपये का ‘सेवा निधि पैकेज’ (Seva Nidhi Package) दिया जाता है। नए बदलावों में, स्थायी होने वाले 50% जवानों के लिए पेंशन लाभ (Pension Benefits) सुनिश्चित होंगे, जबकि बाहर होने वाले जवानों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और राज्य पुलिस में नौकरी की पुख्ता कानूनी गारंटी देने का खाका खींचा जा रहा है।
सैन्य क्षमता और मनोबल पर क्या होगा असर?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेंशन रेट को बढ़ाकर 50% करने से भारतीय सशस्त्र बलों (Armed Forces) को दोहरे स्तर पर फायदा होगा:
* अनुभवी जवानों की कमी नहीं होगी: सेना के कई पूर्व जनरलों ने चिंता जताई थी कि महज 25% जवानों को रोकने से बटालियनों में ‘अनुभवी सैनिकों’ (Seasoned Soldiers) का अनुपात बिगड़ सकता है। 50% रिटेंशन से सेना का युवा प्रोफाइल भी बना रहेगा और तकनीकी रूप से दक्ष जवानों का एक मजबूत कोर ग्रुप भी तैयार होगा।
* मानसिक तनाव से मुक्ति: 4 साल के कार्यकाल के दौरान जवानों के भीतर इस बात का भारी तनाव रहता था कि वे उस संकरे 25% के दायरे में आ पाएंगे या नहीं। अवसर का दायरा दोगुना होने से सैनिकों का मनोबल बढ़ेगा और वे बिना किसी असुरक्षा के देश सेवा कर सकेंगे।
राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक और रणनीतिक चश्मे से देखा जाए, तो ‘अग्निवीर’ योजना में यह बदलाव सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ‘व्यावहारिक कूटनीति’ (Pragmatic Politics) को दर्शाता है। लोकतंत्र में जनभावनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होती है।
इस संशोधन के जरिए सरकार विपक्ष के उस सबसे धारदार नैरेटिव की हवा निकाल देगी, जिसमें अग्निवीरों के भविष्य को असुरक्षित बताया जा रहा था। साथ ही, बचे हुए 50% जवानों के लिए कॉर्पोरेट, अर्धसैनिक बलों (Paramilitary) और राज्य पुलिस भर्तियों में रोजगार की पुख्ता कानूनी गारंटी देने की तैयारी भी चल रही है। आगामी मानसून सत्र में रक्षा मंत्री इस नए और संशोधित ‘अग्निपथ 2.0’ का आधिकारिक खाका संसद के पटल पर रख सकते हैं।



