टीएमसी में बगावत का चरम: अभिषेक बनर्जी ने देर रात की लोकसभा स्पीकर से मुलाकात
20 'बागी' सांसदों की सदस्यता रद्द करने की उठाई आधिकारिक मांग

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची अंदरूनी राजनीतिक उथल-पुथल अब सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक पहुंच गई है। पार्टी के भीतर उठी बगावत की चिंगारी को कुचलने और अनुशासनहीनता पर कड़ा संदेश देने के लिए टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बीती रात एक बेहद आक्रामक और बड़ा कदम उठाया है।
कल देर रात अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। इस हाई-वोल्टेज मुलाकात के दौरान उन्होंने टीएमसी के 20 ‘बागी’ लोकसभा सांसदों की सूची और उनके खिलाफ सबूत सौंपते हुए, संविधान के नियमों के तहत उनकी लोकसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द (Disqualification) करने की आधिकारिक मांग की है।
दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) का दिया गया हवाला
सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को एक विस्तृत रिपोर्ट (Dossier) सौंपी है, जिसमें इन 20 सांसदों की ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के पुख्ता सबूत शामिल हैं। टीएमसी नेतृत्व का आरोप है कि ये सांसद पिछले कुछ समय से न केवल पार्टी व्हिप (Whip) का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि विपक्षी खेमों (मुख्य रूप से भाजपा) के शीर्ष नेताओं के साथ गुप्त संपर्क में भी हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) यानी ‘दल-बदल विरोधी कानून’ का कड़ाई से हवाला दिया है। इस कानून के तहत, यदि कोई निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या सदन में पार्टी के निर्देशों (व्हिप) के विपरीत वोट करता है (या अनुपस्थित रहता है), तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। टीएमसी ने मांग की है कि इन बागियों के कृत्य स्पष्ट रूप से पार्टी छोड़ने के समान हैं, इसलिए स्पीकर को बिना किसी देरी के इनकी सदस्यता समाप्त करनी चाहिए।
बगावत की जड़ें: आखिर क्यों बागी हुए 20 सांसद?
टीएमसी के भीतर एक साथ 20 सांसदों का बागी हो जाना भारतीय राजनीति के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस भारी असंतोष के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं:
नेतृत्व का टकराव (Old Guard vs New Guard): तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के पुराने वफादारों और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले युवा और आक्रामक खेमे के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। बताया जा रहा है कि बागी गुट के अधिकांश सांसद पुराने खेमे के हैं, जो पार्टी में अपने घटते कद और फैसलों में दरकिनार किए जाने से नाराज हैं।
केंद्रीय एजेंसियों का दबाव: कई बागी सांसदों पर भ्रष्टाचार और घोटालों के पुराने आरोप हैं, जिनकी जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। टीएमसी आलाकमान का मानना है कि ये सांसद जांच से बचने के लिए ‘सुरक्षित राजनीतिक ठिकाने’ की तलाश में विरोधी खेमे के साथ पर्दे के पीछे से सौदेबाजी कर रहे हैं।
आगे क्या? स्पीकर के पाले में है अब गेंद
अभिषेक बनर्जी की इस आधिकारिक शिकायत के बाद अब पूरी राजनीतिक गेंद लोकसभा अध्यक्ष के पाले में आ गई है। संसदीय नियमों के अनुसार, स्पीकर अब इन 20 सांसदों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर सकते हैं, जिसमें उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए कुछ दिनों का समय दिया जाएगा।
यदि लोकसभा अध्यक्ष टीएमसी की याचिका को स्वीकार करते हुए इन 20 सांसदों को अयोग्य घोषित कर देते हैं, तो लोकसभा का गणित अचानक से बदल जाएगा और पश्चिम बंगाल में एक साथ 20 सीटों पर उपचुनाव (By-Elections) की नौबत आ जाएगी। वहीं, दूसरी तरफ यदि बागी सांसद अपना अलग गुट बनाकर यह साबित कर देते हैं कि उनके पास पार्टी के कुल सांसदों का दो-तिहाई बहुमत है, तो वे दल-बदल कानून के तहत खुद को बचा भी सकते हैं।
फिलहाल, इस देर रात की मुलाकात ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। आने वाले कुछ दिन टीएमसी के भविष्य और संसद के शक्ति-संतुलन के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।