रेलवे ने अवसंरचना, माल ढुलाई, सुरक्षा और शहरी संपर्क से जुड़ी 12 सौ करोड़ की परियोजनाओं को दी मंजूरी

नई दिल्ली : भारतीय रेलवे ने देश में रेल अवसंरचना, माल ढुलाई क्षमता, सुरक्षा और शहरी संपर्क को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें गुजरात के कच्छ क्षेत्र में 493 करोड़ रुपये की लागत से आदिपुर–भुज दोहरीकरण परियोजना, महाराष्ट्र में 172 करोड़ रुपये की सोमटणे–चिखली कॉर्ड लाइन परियोजना, पूर्वी रेलवे में 405 करोड़ रुपये की सिग्नलिंग आधुनिकीकरण परियोजना तथा इंदौर यार्ड में 139 करोड़ रुपये की लागत से शास्त्रीय रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) के पुनर्निर्माण की परियोजना शामिल हैं।
रेल मंत्रालय ने बुधवार को इनकी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार इन परियोजनाओं की मंजूरी के साथ भारतीय रेलवे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अवसंरचना निर्माण, क्षमता विस्तार, बहु-माध्यम संपर्क और कुशल माल परिवहन नेटवर्क के विकास के अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है। इन पहलों से रेल सेवाओं की विश्वसनीयता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता में सुधार होगा तथा बढ़ती परिवहन, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में सहायता मिलेगी।
रेलवे के अनुसार आदिपुर–भुज दोहरीकरण परियोजना से कच्छ क्षेत्र में रेल संपर्क और क्षमता में वृद्धि होगी। इसके माध्यम से प्रतिदिन प्रत्येक दिशा में दो अतिरिक्त यात्री ट्रेन सेवाएं चलाने की सुविधा मिलेगी तथा अतिरिक्त 12 मिलियन टन प्रति वर्ष माल ढुलाई संभव होगी। महाराष्ट्र की सोमटणे–चिखली कॉर्ड लाइन परियोजना से पनवेल जंक्शन पर भीड़भाड़ कम होगी और मालगाड़ियों के ठहराव समय में लगभग 110 मिनट की कमी आएगी। इससे लॉजिस्टिक्स दक्षता और माल परिवहन में सुधार होगा।
पूर्वी रेलवे में सिग्नलिंग आधुनिकीकरण परियोजना के तहत 32 स्टेशनों पर पुराने रिले आधारित इंटरलॉकिंग सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदला जाएगा। इससे रेल संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और खराबी का शीघ्र पता लगाने की क्षमता बढ़ेगी। वहीं, इंदौर यार्ड में शास्त्रीय आरओबी के पुनर्निर्माण के तहत सेवा मार्गों सहित चार लेन का रोड ओवर ब्रिज बनाया जाएगा, जिससे यातायात जाम में कमी आएगी तथा रेल और सड़क यातायात दोनों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा।



