महाराष्ट्र में फिर महा-खेला : लोकसभा स्पीकर से मिलेंगे उद्धव गुट के बागी सांसद, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंचे! ऑपरेशन टाइगर का काउंटडाउन शुरू

नई दिल्ली/मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। महाविकास अघाड़ी और उद्धव ठाकरे को बहुत जल्द एक बड़ा झटका लग सकता है। सूबे की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत एक बहुत बड़ा खेल होने जा रहा है, जिसकी पटकथा पिछले कई दिनों से बैकस्टेज लिखी जा रही थी। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) के कम से कम 6 बागी सांसद आज नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। इस बड़े सियासी घटनाक्रम को अंजाम देने के लिए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी खुद दिल्ली पहुंच चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी (TMC) के अंदर मची कलह की चर्चा अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि अब महाराष्ट्र में उद्धव गुट के भीतर एक बहुत बड़ी सेंधमारी की खबर सामने आ गई है। शिवसेना (यूबीटी) में होने वाली इस बड़ी बगावत पर आज ही मुहर लग सकती है। बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के करीब 6 से 7 सांसद बुधवार सुबह-सुबह ही देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। अंदरखाने से आ रही खबरों के मुताबिक, ये सभी बागी सांसद आज सुबह शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे व सांसद श्रीकांत शिंदे के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर एक बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं।
श्रीकांत शिंदे के दिल्ली आवास पर जुटी सियासी दिग्गजों की टोली
श्रीकांत शिंदे के आवास पर होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में खुद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे मौजूद रहने वाले हैं। एकनाथ शिंदे विशेष विमान से मुंबई से दिल्ली पहुंच चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, परभणी के सांसद संजय उर्फ बंधु जाधव और यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख भी एक विशेष चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली लैंड कर चुके हैं।
राजनीतिक गलियारों में तैर रही खबरों के मुताबिक, इस बैठक के तुरंत बाद ये सभी सांसद सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने संसद भवन जाएंगे। वहां ये सांसद सबसे पहले लोकसभा के भीतर अपना एक अलग गुट बनाने की कानूनी और औपचारिक प्रक्रिया को पूरा करेंगे। इसके बाद, बिना किसी देरी के इस नए गुट का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना में औपचारिक रूप से विलय करा दिया जाएगा।
तकनीकी अड़चनों से बचने के लिए एकनाथ शिंदे की लीगल टीम एक्टिव
इस बड़े सियासी उलटफेर के बीच, एकनाथ शिंदे की विशेष लीगल टीम भी आनन-फानन में दिल्ली पहुंच चुकी है। सूत्रों का कहना है कि यदि शिवसेना (UBT) के ये सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थामते हैं, तो उस दौरान पैदा होने वाली सभी संवैधानिक, संसदीय और कानूनी बारीकियों को बिना किसी गलती के पूरा करने के लिए इस लीगल टीम को मोर्चे पर लगाया गया है।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उद्धव गुट की तरफ से होने वाले किसी भी संभावित कानूनी विवाद या तकनीकी अड़चन से पूरी तरह बचने के लिए एकनाथ शिंदे ने पहले ही अपनी कानूनविदों की टीम को चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दे दिए थे। इस संभावित राजनीतिक विस्फोट को देखते हुए शिंदे गुट फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और सारी प्रक्रियाएं नियमों के दायरे में रहकर पूरी की जा रही हैं।
मातोश्री की आपात बैठक रही पूरी तरह फ्लॉप, बगावत की खबरों पर लगी मुहर
इस बगावत की सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब उद्धव ठाकरे द्वारा अपने मुंबई स्थित निवास ‘मातोश्री’ पर बुलाई गई आपातकालीन बैठक पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। उद्धव की इस इमरजेंसी मीटिंग में पार्टी के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से सिर्फ चार सांसद ही पहुंचे। पांच सांसदों की इस गैरमौजूदगी के बाद से ही बगावत की अटकलों ने आग पकड़ ली।
सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट के कम से कम छह लोकसभा सांसद सीधे तौर पर शिंदे गुट के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि ये बागी सांसद आगामी 19 जून को औपचारिक रूप से शिंदे गुट की सदस्यता ले सकते हैं, क्योंकि इसी दिन शिवसेना का स्थापना दिवस भी है।
शिंदे गुट के संपर्क में बताए जा रहे इन 6 सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:
सांसद संजय दिना पाटिल
सांसद संजय देशमुख
सांसद नागेश पाटिल आष्टिकर
सांसद ओमराजे निंबाळकर
सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे
सांसद संजय जाधव
साल 2022 का इतिहास फिर दोहराने की चौखट पर महाराष्ट्र
सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम ठीक ऐसे समय पर सामने आ रहा है, जब कुछ ही दिनों बाद एकनाथ शिंदे की उस ऐतिहासिक बगावत के चार साल पूरे होने वाले हैं, जिसने मूल शिवसेना को दो धड़ों में बांट दिया था।
याद दिला दें कि 19 जून, 1966 को बालासाहेब ठाकरे द्वारा खड़ी की गई शिवसेना को एकनाथ शिंदे ने साल 2022 में दो हिस्सों में तोड़ दिया था। तब शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के अधिकांश विधायक और सांसद अलग हो गए थे। इसके बाद शिंदे गुट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई और कानूनी लड़ाई जीतकर चुनाव आयोग से असली शिवसेना का नाम और पार्टी का ‘तीर-कमान’ चुनाव चिन्ह भी अपने नाम कर लिया था। अब ठीक वैसा ही इतिहास लोकसभा में भी दोहराए जाने की पूरी तैयारी है।



