महाकुंभ 2027 की तैयारियां तेज
CM योगी का सख्त निर्देश- 'नवंबर 2026 तक पूरे हों सभी स्थायी काम', प्रयागराज में विकास कार्यों की हाई-लेवल समीक्षा

प्रयागराज (राघवेंद्र प्रताप सिंह): सनातन धर्म के सबसे बड़े और भव्य वैश्विक समागम ‘महाकुंभ 2027’ को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रयागराज में आगामी वर्ष आयोजित होने वाले इस महाआयोजन की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर पर एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण के आला अधिकारियों को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट अल्टीमेटम जारी किया है।
सीएम योगी ने दो-टूक शब्दों में निर्देश दिया है कि महाकुंभ से जुड़े जितने भी स्थायी निर्माण कार्य (Permanent Infrastructure Works) हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर आगामी नवंबर 2026 तक शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाए। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अंतिम समय में किसी भी तरह की हड़बड़ी न मचे और कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
आखिर क्यों क्रिटिकल है नवंबर 2026 की डेडलाइन?
प्रयागराज महाकुंभ आधिकारिक रूप से जनवरी 2027 के मध्य में मकर संक्रांति के स्नान के साथ शुरू होना प्रस्तावित है। इस आयोजन में देश-विदेश से लगभग 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों के आने का भारी अनुमान है।
मुख्यमंत्री द्वारा नवंबर 2026 की समय-सीमा तय करने के पीछे एक बहुत ही सोची-समझी प्रशासनिक रणनीति है। यदि ओवरब्रिज, सड़कें, स्थायी पक्के घाट और ड्रेनेज सिस्टम जैसे स्थायी निर्माण कार्य नवंबर तक पूरे हो जाते हैं, तो प्रशासन के पास पूरे दिसंबर का महीना कमियों को जांचने और उनके ‘ट्रायल रन’ (Trial Runs) के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके बाद प्रशासन अपना पूरा ध्यान दिसंबर के महीने में टेंट सिटी बसाने, पांटून पुल (Pontoon Bridges) बनाने, अस्थायी चिकित्सालय और बिजली-पानी की लाइनें बिछाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर केंद्रित कर सकेगा।
प्रयागराज का बुनियादी ढांचागत कायाकल्प
महाकुंभ 2027 के मद्देनजर केवल मेला क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे प्रयागराज शहर का कायाकल्प किया जा रहा है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागवार कार्यों की प्रगति का ब्योरा लिया:
सड़कों का चौड़ीकरण और सुंदरीकरण: प्रयागराज को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और शहर की आंतरिक सड़कों को ‘फोर-लेन’ और ‘सिक्स-लेन’ में बदला जा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों की डिजिटल मैपिंग के जरिए चौड़ीकरण और सुंदरीकरण का काम तेज कर दिया गया है।
स्थायी घाटों का विशाल नेटवर्क: गंगा और यमुना के तटों पर नए और लंबे स्थायी पक्के घाटों का निर्माण युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्नान पर्वों के दौरान घाटों पर अचानक उमड़ने वाली अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करना और भगदड़ जैसी स्थितियों को रोकना है।
रेलवे और एयरपोर्ट का भारी विस्तार: प्रयागराज जंक्शन समेत शहर के अन्य सैटेलाइट स्टेशनों पर नए प्लेटफॉर्म, बड़े यात्री शेल्टर और चौड़े फुट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच रहा है। वहीं, उड़ानों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयागराज एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का विस्तार कार्य भी तेजी से चल रहा है।
सुरक्षा और तकनीक का अभेद्य चक्र (AI का उपयोग)
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि महाकुंभ 2026-27 केवल आस्था का महासंगम नहीं होगा, बल्कि यह नए भारत की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता का एक वैश्विक ‘शोकेस’ भी होगा। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।
पूरे मेला क्षेत्र और प्रयागराज शहर की 24×7 निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ (ICCC) को अपग्रेड किया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में फेस-रिकग्निशन कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे संदिग्धों की पहचान और भीड़ के घनत्व (Crowd Density) पर रीयल-टाइम नजर रखी जा सकेगी।
अंत में सीएम योगी ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि महाकुंभ के विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई, वित्तीय अनियमितता या लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का एकमात्र संकल्प है कि वर्ष 2019 के कुंभ की सफलता के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 2027 के इस आयोजन को ‘स्वच्छ कुंभ, सुरक्षित कुंभ’ के रूप में विश्व पटल पर स्थापित किया जाए।



