Trending

सोशल मीडिया के ‘वित्तीय गुरुओं’ पर सेबी का चाबुक

फिनफ्लुएंसर्स के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, ब्रोकर्स के साथ प्रॉफिट-शेयरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध

मुंबई (अभिषेक सिंह): भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की बाढ़ के साथ ही सोशल मीडिया पर वित्तीय सलाह देने वाले ‘फिनफ्लुएंसर्स’ (Financial Influencers) का दबदबा तेजी से बढ़ा है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर रातों-रात अमीर बनाने का दावा करने वाले इन अनधिकृत सलाहकारों पर अब बाजार नियामक सेबी (SEBI – भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने अपनी सबसे बड़ी डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक की है। सेबी ने रील्स और वीडियो के जरिए सीधे-सीधे स्टॉक टिप्स देने वाले फिनफ्लुएंसर्स के लिए नए और बेहद कड़े नियम जारी किए हैं। नए दिशानिर्देशों के तहत अब किसी भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के लिए वित्तीय सलाह देने से पहले सेबी के पास आधिकारिक पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, सेबी ने फिनफ्लुएंसर्स और स्टॉक ब्रोकर्स के बीच चलने वाले ‘प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल’ पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

क्यों पड़ी सेबी को इस कड़े एक्शन की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार में ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ (Options Trading) और पेनी स्टॉक्स का क्रेज बहुत बढ़ा है। बिना किसी प्रामाणिक डिग्री, वित्तीय विशेषज्ञता या रिसर्च के, लाखों फॉलोअर्स वाले कई फिनफ्लुएंसर्स रील्स बनाकर सीधे तौर पर किसी खास शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह दे रहे थे।

जांच में पाया गया कि इनमें से कई इन्फ्लुएंसर्स ‘पंप एंड डंप’ (Pump and Dump) के खेल में शामिल थे—यानी वे पहले खुद किसी सस्ते शेयर को कम कीमत पर खरीदते थे, फिर अपने वीडियो के जरिए उसे प्रमोट करके उसकी कीमत बढ़वाते थे (पंप), और जैसे ही आम निवेशक उसमें पैसा लगाते थे, ये खुद मुनाफा कमाकर बाहर निकल जाते थे (डंप)। इसके अलावा, कई फिनफ्लुएंसर्स विभिन्न ब्रोकिंग कंपनियों के ‘एफिलिएट लिंक’ (Affiliate Links) प्रमोट कर रहे थे। जब कोई आम नागरिक उस लिंक से अपना डीमैट खाता खोलता था और ट्रेडिंग करता था, तो ब्रोकर को मिलने वाले ब्रोकरेज कमीशन का एक बड़ा हिस्सा (प्रॉफिट-शेयरिंग) सीधे उस इन्फ्लुएंसर की जेब में जाता था। इस वजह से ये इन्फ्लुएंसर्स जानबूझकर लोगों को अधिक-से-अधिक रिस्की ट्रेडिंग करने के लिए उकसाते थे।

सेबी के नए नियमों के मुख्य बिंदु
सेबी द्वारा जारी किए गए नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क ने इन अनियंत्रित गतिविधियों के रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए हैं:

अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: अब कोई भी व्यक्ति जो सोशल मीडिया पर निवेश, ट्रेडिंग या वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़ी सलाह देता है, उसे सेबी के पास रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर (RIA) या रिसर्च एनालिस्ट (RA) के रूप में पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए न्यूनतम योग्यता और नेटवर्थ के कड़े मापदंड तय किए गए हैं।

प्रॉफिट-शेयरिंग पर पूर्ण रोक: सेबी के अधीन पंजीकृत कोई भी स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस या निवेश संस्थान किसी भी गैर-पंजीकृत (Unregistered) फिनफ्लुएंसर के साथ अपना रेवेन्यू या प्रॉफिट शेयर नहीं कर सकेगा। एफिलिएट मार्केटिंग और रेफरल कोड्स के जरिए होने वाली कमाई पर यह सीधा प्रहार है।

विज्ञापनों के लिए ‘डिस्क्लेमर’ जरूरी: यदि कोई रजिस्टर्ड फिनफ्लुएंसर किसी वित्तीय उत्पाद का सशुल्क प्रमोशन (Paid Promotion) करता है, तो उसे वीडियो की शुरुआत में बड़े अक्षरों में यह स्पष्ट करना होगा कि यह एक विज्ञापन है।

बाजार और निवेशकों पर क्या होगा असर?
सेबी के इस ऐतिहासिक कदम का बाजार के जानकारों ने पुरजोर स्वागत किया है। इस कड़े कानून से सोशल मीडिया पर चल रही ‘फर्जी वित्तीय गुरुओं’ की दुकानें लगभग बंद हो जाएंगी। जो लोग केवल व्यूज और कमर्शियल डील्स के लिए मासूम निवेशकों को गुमराह कर रहे थे, वे अब कानूनी दायरे में आ जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले फिनफ्लुएंसर्स पर सेबी करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके बैंक खातों को फ्रीज और उन्हें बाजार से प्रतिबंधित (Debar) कर सकता है।

हालांकि, इस नियम से उन ब्रोकर्स और टेक-प्लेटफॉर्म्स के नए ग्राहकों की संख्या में थोड़ी कमी आ सकती है जो पूरी तरह से इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर निर्भर थे। लेकिन लंबी अवधि में, यह भारतीय शेयर बाजार के इकोसिस्टम को बेहद सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा। छोटे और नए निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सेबी का यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।

Related Articles

Back to top button