विस्फोटक तस्करी मामले में केरल के चार जिलों में एनआईए का छापा

तिरुवनंतपुरम : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विस्फोटकों की तस्करी, अवैध परिवहन और भंडारण से जुड़े मामले की जांच के तहत शनिवार को केरल के चार जिलों में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मलप्पुरम, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में एक साथ कई स्थानों पर की गई। जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल अवैध विस्फोटक परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसकी विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है।
यह मामला सबसे पहले मलप्पुरम जिले के तिरुरंगडी पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों और मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में इसकी जांच एनआईए को सौंप दी गई। एनआईए अब इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है ताकि यह पता लग सके कि विस्फोटकों की आपूर्ति कहां से की जा रही थी, उनका अंतिम उपयोग क्या होना था।
एनआईए के अनुसार इस मामले का खुलासा 7 फरवरी को हुआ था। उस दिन मलप्पुरम जिले के तिरुरंगडी के निकट चेम्माड क्षेत्र में एक ट्रक संदिग्ध परिस्थितियों में पहुंचा था। ट्रक एक ऐसी औद्योगिक इकाई में गया था जहां खोखली ईंटों का निर्माण और बिक्री की जाती है। पुलिस को वाहन की गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसकी तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान पुलिस अधिकारियों को ट्रक में रखी प्याज की बोरियों के नीचे बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी हुई मिली। यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चौंकाने वाली थी क्योंकि विस्फोटकों को सामान्य माल की आड़ में गुप्त रूप से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरी खेप जब्त कर ली और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
आगे की जांच में विस्फोटकों की आपूर्ति का स्रोत कोझिकोड जिले के मुक्कम निवासी हैरिस तक पहुंचा। जांच एजेंसियों के अनुसार हैरिस इस पूरे नेटवर्क की एक प्रमुख कड़ी है और उस पर अवैध रूप से विस्फोटकों की खरीद, आपूर्ति और वितरण में शामिल होने का आरोप है। उसे मामले का मुख्य आरोपित बनाया गया है, लेकिन वह अभी भी फरार है।
एनआईए की टीमें उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि हैरिस की गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
एनआईए अधिकारियों ने आज मुक्कम स्थित हैरिस के आवास तथा उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गहन तलाशी ली। इसके अतिरिक्त ट्रक मालिक, विस्फोटकों के परिवहन में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों और उस ईंट निर्माण इकाई के मालिक के घरों एवं परिसरों की भी जांच की गई, जहां विस्फोटकों की खेप पहुंचाई गई थी।
तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य सामग्री अपने कब्जे में ली है। इन सामग्रियों की फोरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेन-देन और संपर्क सूत्रों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
उल्लेखनीय है कि मामले की प्रारंभिक जांच के दौरान तिरुरंगडी पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की थी। अब तक इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपित बनाया गया है, जबकि शुरुआती चरण में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां अब फरार आरोपितों और उनसे जुड़े अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही हैं।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपितों ने दावा किया था कि विस्फोटकों का उपयोग खदानों में पत्थर तोड़ने और खुदाई कार्यों के लिए किया जाना था। हालांकि जांच में यह दावा संदेह के घेरे में आ गया, क्योंकि संबंधित व्यक्तियों के पास विस्फोटकों के उपयोग या खनन कार्य से संबंधित कोई वैध लाइसेंस या अनुमति नहीं पाई गई।
एनआईए ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए अब कन्नूर जिले के चेरुपुझा तथा कासरगोड जिले के चित्तरिक्कल क्षेत्र में भी व्यापक तलाशी अभियान चलाया। चित्तरिक्कल में जॉर्ज नामक व्यक्ति के घर की तलाशी के दौरान जिलेटिन की छड़ें बरामद की गईं, जिन्हें विस्फोटक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा कम्पल्लूर क्षेत्र में एक पूर्व खदान मालिक के आवास तथा चेरुपुझा स्थित एक अन्य संदिग्ध ठिकाने की भी तलाशी ली गई। अधिकारियों का मानना है कि इन स्थानों से प्राप्त साक्ष्य मामले की जांच को नई दिशा दे सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और हालिया तलाशी अभियान के दौरान मिले दस्तावेजों व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद कई नए खुलासे हो सकते हैं। एनआईए ने संकेत दिया है कि जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं। एजेंसी का उद्देश्य पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।————



