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बिहार में फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा पुल

जमुई में 7.32 करोड़ की लागत से बन रहे पुल का स्लैब धंसा, निर्माण कंपनी सवालों के घेरे में

बिहार में निर्माणाधीन पुलों के गिरने और धंसने का अंतहीन सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के जमुई जिले में 7.32 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहे एक महत्वपूर्ण पुल का बड़ा स्लैब (Slab) अचानक भरभरा कर धंस गया। इस घटना ने एक बार फिर निर्माण कंपनियों की गुणवत्ता और विभागीय भ्रष्टाचार पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

बिहार में पुलों का टूटना और धंसना जैसे कोई आम बात हो गई है। सरकारी खजाने की करोड़ों रुपये की बर्बादी का एक और ताजा उदाहरण जमुई जिले से सामने आया है। यहां ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा 7.32 करोड़ रुपये की लागत से एक नदी पर बन रहे पुल का एक बड़ा हिस्सा (स्लैब) ढलाई के कुछ ही दिनों बाद अचानक बीच से टूटकर धंस गया। गनीमत यह रही कि यह हादसा देर रात हुआ, जिससे वहां काम कर रहे किसी भी मजदूर की जान नहीं गई।

घटिया निर्माण सामग्री का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस पुल के निर्माण में शुरुआत से ही भारी अनियमितताएं बरती जा रही थीं। ठेकेदार द्वारा मानक के विपरीत अत्यंत घटिया किस्म के सीमेंट, बालू और पतले लोहे के सरियों (TMT Bars) का इस्तेमाल किया जा रहा था। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय इंजीनियरों से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन कमीशन के खेल के चलते किसी ने उनकी नहीं सुनी। नतीजा यह हुआ कि पहली तेज बारिश और स्लैब के वजन को ही पुल का ढांचा सहन नहीं कर सका और वह बीच से झुककर धंस गया।

निर्माण कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत
यह पुल इलाके के दर्जनों गांवों को मुख्य शहर से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट था, जिसका काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। हादसे के बाद निर्माण कंपनी के ठेकेदार और मुंशी मौके से फरार हो गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में ‘ठेकेदार-इंजीनियर-नेता’ के उस भ्रष्ट नेक्सस (Nexus) को उजागर कर दिया है, जिसके कारण जनता के टैक्स का पैसा पानी में बह रहा है।

विपक्ष का सरकार पर कड़ा प्रहार
पुल धंसने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि बिहार में ‘भ्रष्टाचार का मॉडल’ चल रहा है। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया है कि जब तक निर्माण कंपनियों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) नहीं किया जाएगा और दोषी इंजीनियरों को जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक राज्य में पुलों के गिरने का यह सिलसिला नहीं रुकेगा।

प्रशासन की लीपापोती और जांच के आदेश
भारी फजीहत के बाद, जिलाधिकारी (DM) और ग्रामीण कार्य विभाग के आला अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया है। संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और निर्माण कार्य को तत्काल रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुल निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए एक तकनीकी टीम (Technical Committee) का गठन कर दिया है। सरकार ने दावा किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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