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चंद्रमा के ‘अदृश्य हिस्से’ का रहस्य

चीन के मानवरहित मिशन ने भेजे नए भूवैज्ञानिक साक्ष्य, अंतरिक्ष अन्वेषण में रचा इतिहास

बीजिंग/नई दिल्ली (अंतरिक्ष एवं विज्ञान डेस्क): ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में अंतरिक्ष विज्ञान ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। चीन के नवीनतम मानवरहित चंद्र मिशन ने चंद्रमा के ‘सुदूर या अदृश्य हिस्से’ (Far Side of the Moon) पर सफलतापूर्वक वैज्ञानिक अन्वेषण करते हुए वहां से अत्यंत महत्वपूर्ण और नए भूवैज्ञानिक साक्ष्य पृथ्वी पर प्रेषित किए हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल चंद्रमा की उत्पत्ति के रहस्यों से पर्दा उठाएगी, बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगी।

क्या है चंद्रमा का ‘अदृश्य हिस्सा’?
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण और चंद्रमा की परिक्रमा गति (Tidal Locking) के कारण, पृथ्वी से चंद्रमा का केवल एक ही हिस्सा दिखाई देता है। जो हिस्सा कभी पृथ्वी के सामने नहीं आता, उसे तकनीकी भाषा में ‘डार्क साइड’ या ‘अदृश्य हिस्सा’ कहा जाता है। यह क्षेत्र चंद्रमा के दिखाई देने वाले हिस्से (Near Side) से भौगोलिक रूप से बिल्कुल अलग है। यहां बड़े-बड़े गहरे क्रेटर (गड्ढे) और प्राचीन चट्टानें मौजूद हैं, लेकिन पृथ्वी से सीधा संपर्क न होने के कारण यहां किसी भी यान को उतारना और वहां से डेटा भेजना अंतरिक्ष विज्ञान की सबसे जटिल चुनौतियों में से एक माना जाता है।

संचार उपग्रह और तकनीकी विजय
चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने इस जटिल चुनौती को पार करने के लिए एक विशेष ‘रिले सैटेलाइट’ (संचार उपग्रह) का उपयोग किया, जो चंद्रमा की कक्षा में पहले से ही स्थापित है। इस उपग्रह के माध्यम से ही चंद्रमा के अदृश्य हिस्से पर मौजूद रोवर ने अपने द्वारा एकत्र किए गए चट्टानों और मिट्टी के रासायनिक विश्लेषण का डेटा सुरक्षित रूप से पृथ्वी के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाया।

नए भूवैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व
प्राप्त हुए शुरुआती डेटा से संकेत मिला है कि चंद्रमा के इस हिस्से की परत (Crust) अधिक मोटी है और यहां ज्वालामुखीय गतिविधियों का इतिहास भी पृथ्वी की ओर वाले हिस्से से भिन्न रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन नए साक्ष्यों के गहन अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि अरबों वर्ष पहले जब सौर मंडल का निर्माण हो रहा था, तब चंद्रमा और पृथ्वी का विकास किन परिस्थितियों में हुआ था। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र में बहुमूल्य खनिजों और ‘हीलियम-3’ (Helium-3) की मौजूदगी की संभावनाओं को भी बल मिला है, जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।

चीन के इस सफल मिशन ने वैश्विक ‘अंतरिक्ष दौड़’ (Space Race) को और अधिक रोचक बना दिया है। यह सफलता दर्शाती है कि गहरे अंतरिक्ष के अन्वेषण (Deep Space Exploration) में मानव निर्मित रोबोटिक तकनीक कितनी उन्नत हो चुकी है। अब पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों की निगाहें इन नए साक्ष्यों के विस्तृत विश्लेषण पर टिकी हैं।

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