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सोना न खरीदें, वॉक टू वर्क अपनाएं: जंग के आर्थिक संकट के बीच 24 घंटे में पीएम मोदी ने दूसरी बार देशवासियों से की अपील

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। पिछले 24 घंटों में दूसरी बार देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ कुछ कड़े लेकिन जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिस तरह देश ने एकजुट होकर कोरोना का मुकाबला किया था, उसी तरह इस वैश्विक संकट से भी पार पाया जा सकता है।

पेट्रोल-डीजल में बचत और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर

प्रधानमंत्री ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए ईंधन की खपत घटाने की अपील की है। उन्होंने कहा, “मेरी हर नागरिक से प्रार्थना है कि जहां संभव हो, पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।” पीएम ने कारपूलिंग (एक गाड़ी में कई लोगों का सफर) को बढ़ावा देने की भी बात कही ताकि सड़क पर गाड़ियों की संख्या कम हो और ईंधन की बचत की जा सके।

‘वर्क फ्रॉम होम’ और वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता

डिजिटल इंडिया की ताकत का हवाला देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज तकनीक ने हमारे काम को आसान बना दिया है। उन्होंने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के दफ्तरों से आग्रह किया कि वे ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) और वर्चुअल मीटिंग्स को फिर से प्राथमिकता दें। इससे न केवल सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा, बल्कि ईंधन की भारी बचत भी होगी।

सोना खरीदने से बचें, वोकल फॉर लोकल को बनाएं आंदोलन

पीएम मोदी ने एक चौंकाने वाली लेकिन महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा कि जब तक हालात सामान्य न हों, लोग सोने की खरीदारी टाल दें। उन्होंने समझाया कि सोने के आयात (Import) पर देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया और विदेशी सामानों की जगह स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया।

पश्चिम एशिया का युद्ध: इस दशक का बड़ा संकट

प्रधानमंत्री ने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना सदी के सबसे बड़े संकट ‘कोरोना’ से की। उन्होंने कहा, “अगर कोरोना इस सदी का सबसे बड़ा संकट था, तो पश्चिम एशिया का युद्ध इस दशक की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।” उन्होंने युवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भरोसा जताते हुए कहा कि गुजरात के युवाओं की तरह पूरे देश के युवा अब ‘एंटरप्रेन्योर’ बन रहे हैं और यही स्किल्ड वर्कफोर्स आने वाले समय में देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रीढ़ बनेगी।

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