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डिजिटल उत्तर प्रदेश की ओर योगी सरकार का बड़ा कदम

हर जिले में खुलेगा 'एआई एक्सीलेंस सेंटर', युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

लखनऊ (स्टेट न्यूज़ डेस्क): उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ‘तकनीकी हब’ बनाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ के सपने को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। आज लखनऊ में हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में ‘उत्तर प्रदेश एआई मिशन 2026’ के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक ‘एआई एक्सीलेंस सेंटर’ (AI Excellence Center) खोलने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जिला स्तर पर लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

क्या होंगे ये ‘एआई एक्सीलेंस सेंटर’ और कैसे करेंगे काम?
सरकार की योजना के अनुसार, ये सेंटर केवल कंप्यूटर लैब नहीं होंगे, बल्कि अत्याधुनिक शोध और नवाचार (Innovation) के केंद्र होंगे। इन सेंटरों की स्थापना के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर, आईआईटी बीएचयू और प्रदेश के प्रमुख एनआईटी (NIT) के साथ तकनीकी साझेदारी की जाएगी। प्रत्येक सेंटर में उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सर्वर, एआई सॉफ्टवेयर और विशेष डेटा लैब होंगे। यहाँ न केवल एआई तकनीक पर शोध होगा, बल्कि स्थानीय समस्याओं (जैसे कृषि, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था) का एआई आधारित समाधान भी तलाशा जाएगा।

युवाओं और छात्रों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी योजना
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। विशेष रूप से बी.टेक, बी.सी.ए. और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए ये सेंटर ‘कौशल विकास’ (Skill Development) के मुख्य केंद्र बनेंगे।

  • मुफ्त प्रशिक्षण: इन सेंटरों पर छात्रों को मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और रोबोटिक्स में अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • स्टार्टअप को बढ़ावा: यदि कोई युवा अपना एआई स्टार्टअप शुरू करना चाहता है, तो उसे यहाँ ‘इन्क्यूबेशन सपोर्ट’ और मेंटरशिप मिलेगी।
  • स्थानीय रोजगार: अब जौनपुर, गोरखपुर या बरेली जैसे जिलों के युवाओं को हाई-टेक ट्रेनिंग के लिए बेंगलुरु या हैदराबाद नहीं भागना पड़ेगा।
  • प्रशासन और कृषि में आएगा बड़ा बदलाव
    कैबिनेट के प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि इन सेंटरों का उपयोग सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा:
  • स्मार्ट फार्मिंग: एआई के जरिए किसानों को उनकी मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की बीमारियों के बारे में सटीक जानकारी जिला स्तर पर ही उपलब्ध होगी।
  • स्वास्थ्य सेवा: एआई की मदद से सरकारी अस्पतालों में मरीजों के डेटा का विश्लेषण होगा, जिससे गंभीर बीमारियों की पहचान समय रहते की जा सकेगी।
  • सुरक्षा व्यवस्था: पुलिस विभाग इन सेंटरों की मदद से ‘प्रेडिक्टिव पुलिसिंग’ (अपराध होने से पहले उसकी संभावना का आकलन) पर काम करेगा।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह फैसला उत्तर प्रदेश की कार्य-संस्कृति को आधुनिक बनाने वाला है। हर जिले में एआई एक्सीलेंस सेंटर खुलने से न केवल प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पारदर्शी होगी, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश (Global Investment) के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगा। अब ‘यूपी के लड़के’ कोडिंग और एल्गोरिदम के जरिए दुनिया की समस्याओं का समाधान अपने ही जिले से निकाल सकेंगे।

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