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लाल ग्रह पर जीवन की सुगबुगाहट

नासा के रोवर को मंगल पर मिले 'प्राचीन झील' के पुख्ता प्रमाण, ब्रह्मांड विज्ञान में मचा तहलका

वाशिंगटन (स्पेस एवं साइंस डेस्क): मंगल ग्रह (Mars) हमेशा से इंसानों के लिए एक गहरे रहस्य और कौतूहल का विषय रहा है। क्या लाल ग्रह पर कभी हमारी पृथ्वी की तरह जीवन पनपा था? इस सदियों पुराने सवाल का जवाब अब तक की सबसे बड़ी खोज के रूप में सामने आ रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अत्याधुनिक ‘पर्सेवरेंस रोवर’ (Perseverance Rover) ने मंगल ग्रह की सतह पर एक विशालकाय ‘प्राचीन झील’ (Ancient Lake) और बहती नदी के डेल्टा के अब तक के सबसे पुख्ता और नए प्रमाण खोज निकाले हैं। इस युगांतरकारी खोज ने दुनिया भर के खगोलविदों और वैज्ञानिकों को इस बात का ठोस आधार दे दिया है कि अरबों साल पहले मंगल ग्रह सूखा और वीरान नहीं, बल्कि नीले पानी से भरा एक जीवंत ग्रह था।

जेज़ेरो क्रेटर (Jezero Crater) में मिला पानी का इतिहास
नासा का पर्सेवरेंस रोवर फरवरी 2021 से मंगल ग्रह के ‘जेज़ेरो क्रेटर’ नामक एक विशाल गड्ढे में खोजबीन कर रहा है। वैज्ञानिकों का लंबे समय से अनुमान था कि यह क्रेटर कभी एक बहुत बड़ी झील हुआ करता था। अब, रोवर पर लगे ‘ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार’ (RIMFAX) ने सतह के 65 फीट (20 मीटर) नीचे तक स्कैन करके इस अनुमान को 100% सच साबित कर दिया है। रडार के डेटा से स्पष्ट हुआ है कि क्रेटर के नीचे तलछट (Sediments) की बिल्कुल वैसी ही परतें मौजूद हैं, जैसी पृथ्वी पर किसी सूख चुकी झील या नदी के मुहाने (डेल्टा) पर पाई जाती हैं। यह पानी के जमाव और उसके सूखने के स्पष्ट भूवैज्ञानिक हस्ताक्षर हैं।

क्या मंगल पर पनपा था सूक्ष्मजीवी जीवन?
विज्ञान का यह सर्वमान्य नियम है कि ‘जहां पानी है, वहां जीवन की संभावना है।’ प्राचीन झील के इन साक्ष्यों के मिलने का सीधा अर्थ यह है कि लगभग 3 से 4 अरब साल पहले मंगल का वातावरण आज की तरह अत्यधिक ठंडा और रेडियोएक्टिव नहीं था। उस समय का वातावरण इतना गर्म और अनुकूल रहा होगा कि वहां पानी तरल अवस्था में मौजूद था। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि इस प्राचीन झील के शांत पानी में सूक्ष्मजीवों (Microbial Life) के रूप में एलियन जीवन जरूर पनपा होगा। पर्सेवरेंस रोवर वर्तमान में इसी तलछट की चट्टानों में उन प्राचीन सूक्ष्मजीवों के ‘जीवाश्म’ (Fossils) या जैविक संकेत (Biosignatures) तलाश रहा है।

नमूने (Samples) जुटाने का ऐतिहासिक काम जारी
यह खोज केवल रडार स्कैन तक सीमित नहीं है। पर्सेवरेंस रोवर मंगल की सतह पर ड्रिलिंग करके इन तलछटी चट्टानों (Sedimentary rocks) के बेलनाकार नमूने (Samples) सावधानीपूर्वक टाइटेनियम के विशेष ट्यूबों में सील कर रहा है। नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का लक्ष्य 2030 के दशक में ‘मार्स सैंपल रिटर्न मिशन’ (Mars Sample Return Mission) के जरिए इन ट्यूबों को वापस पृथ्वी पर लाना है। जब धरती की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में इन चट्टानों का विश्लेषण किया जाएगा, तब शायद मानव इतिहास की सबसे बड़ी घोषणा हो सकती है।

निष्कर्ष: ब्रह्मांड में हमारी जगह का अहसास
मंगल ग्रह पर प्राचीन झील का यह नया प्रमाण केवल एक खगोलीय घटना नहीं है; यह हमारे अस्तित्व से जुड़ा एक बड़ा सुराग है। यह हमें बताता है कि ग्रहों का वातावरण बदल सकता है और एक समय का हरा-भरा ग्रह भी रेगिस्तान में तब्दील हो सकता है (जो पृथ्वी के लिए भी जलवायु परिवर्तन की एक बड़ी चेतावनी है)। यदि मंगल के इन नमूनों में जीवन के अवशेष मिल जाते हैं, तो यह साबित हो जाएगा कि इस अनंत ब्रह्मांड में जीवन का जन्म कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक सामान्य ब्रह्मांडीय प्रक्रिया है।

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