नाबार्ड योजना से उत्तर बिहार में ग्रामीण पुलों के निर्माण से रोड संपर्क हुआ मजबूत

उत्तर बिहार में नाबार्ड योजना के तहत ग्रामीण पुलों के निर्माण से बाढ़ प्रभावित इलाकों की संपर्कता मजबूत हुई है। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार कोसी, गंडक, बागमती और कमला जैसी नदियों के उफान के समय जिन गांवों का संपर्क टूट जाता था, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नदियों पर पुलों का तेजी से निर्माण कराया गया। पूर्वी चंपारण में 50 ग्रामीण पुल पूरे हो चुके हैं। दरभंगा में 74 पुलों के लक्ष्य के मुकाबले 54 पुल तैयार बताए गए हैं।
सीतामढ़ी में 44, मधुबनी में 55 और समस्तीपुर में 58 पुलों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। विभाग का कहना है कि पहले हल्की बारिश में भी आवागमन नावों पर निर्भर हो जाता था, अब बारहमासी सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
नाबार्ड के कार्यक्रम के तहत झारखंड के 250 से ज्यादा किसानों ने पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाई :
झारखंड के रामगढ़ जिले में 250 से अधिक किसानों ने नाबार्ड के आदिवासी विकास कार्यक्रम के तहत पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाई है। पर्यावरण अनुकूल खेती एक समग्र दृष्टिकोण है, जिसमें कृषि प्रणालियों में पारिस्थितिक सिद्धांतों को लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य स्थिरता, जैव विविधता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
कोरी गांव में नाबार्ड के ‘जीवा’ कार्यक्रम के लाभार्थी देवालाल मुंडा ने बताया कि पहले वह अपनी 1.5 एकड़ जमीन पर केवल धान की खेती करते थे, जिसमें लगभग 22,000 रुपये की लागत आती थी। अब ‘जीवामृत’ (जैविक खाद) के उपयोग से यह लागत घटकर करीब 2,000 रुपये रह गई है।
नाबार्ड के बारे में:
नाबार्ड एक विकास बैंक है जो प्राथमिक तौर पर देश के ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह कृषि एवं ग्रामीण विकास हेतु वित्त प्रदान करने के लिये शीर्ष बैंकिंग संस्थान है। इसका मुख्यालय देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में अवस्थित है। कृषि के अतिरिक्त यह छोटे उद्योगों, कुटीर उद्योगों एवं ग्रामीण परियोजनाओं के विकास के लिये उत्तरदायी है। यह एक सांविधिक निकाय है जिसकी स्थापना वर्ष 1982 में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 के तहत की गई थी।
नाबार्ड के कार्य :
नाबार्ड के कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीण भारत में विशिष्ट लक्ष्य उन्मुख विभागों (Specific Goal Oriented Departments) के माध्यम से वित्तीय समावेशन को सशक्त करना है जिसे व्यापक रूप में तीन शीर्ष भागों वित्तीय, विकास एवं निरीक्षण में वर्गीकृत किया जा सकता है। यह ग्रामीण आधारभूत संरचना के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
नाबार्ड ज़िला स्तरीय ऋण योजनाएँ (district level credit plans) तैयार करता है ताकि उपरोक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने में बैंकिंग उद्योगों को निर्देशित एवं प्रेरित किया जा सके।
यह कोऑपरेटिव बैंकों एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का निरीक्षण करता है और साथ ही उन्हें CBS प्लेटफॉर्म (Core Banking Solution) से जुड़ने में सहयोग करता है।
CBS प्लेटफॉर्म अर्थात् कोर बैंकिंग सॉल्यूशन ब्रांचों का नेटवर्क है जो ग्राहकों को उनके अकाउंट्स के संचालन में समर्थन करता है और CBS नेटवर्क पर मौजूदा बैंकों की किसी भी ब्रांच से बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करता है।
इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की विकास योजनाओं की डिज़ाइनिंग एवं उनके क्रियान्वयन में निहित है।
यह हस्तकला शिल्पकारों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है एवं इन वस्तुओं की प्रदर्शनी हेतु एक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने में उनकी मदद करता है।
नाबार्ड में कई अंतर्राष्ट्रीय भागीदार हैं जिसमें प्रमुख वैश्विक संगठन एवं विश्व बैंक से संबद्ध संस्थान शामिल हैं जो कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नवाचार कर रहे हैं।
ये अंतर्राष्ट्रीय भागीदार संगठन वित्तीय सहायता एवं सलाहकारी सेवाएँ प्रदान करने में एक प्रमुख सलाहकार की भूमिका निभाते हैं ताकि विभिन्न कृषि प्रक्रियाओं के अनुकूलन एवं ग्रामीण लोगों के उत्थान को सुनिश्चित किया जा सके।



