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भारत और जापान ने कई अहम समझौतों पर किए हस्ताक्षर

( विवेक ओझा ): भारत और जापान ने स्वास्थ्य अनुसंधान और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।

स्वास्थ्य और मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओसी) जापान चिकित्सा अनुसंधान एवं विकास एजेंसी, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच किया गया। इसके अलावा, क्वांटम विज्ञान और तकनीक में सहयोग के लिए जापान के कैबिनेट कार्यालय और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिससे भविष्य की उन्नत तकनीकों में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

जापान की उन्नत तकनीक और भारत के कुशल मानव संसाधन एक-दूसरे के पूरक हैं। भारत में क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर-फिजिकल सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्वच्छ ऊर्जा और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है, जिससे संयुक्त रिसर्च और औद्योगिक साझेदारी के नए अवसर बन रहे हैं। जापान की मंत्री किमी ओनोडा ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग की सराहना की। स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों ने संयुक्त रिसर्च, क्षमता निर्माण और फंडिंग के जरिए सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।

भारत जापान राजनीतिक , कूटनीतिक और सामरिक संबंध :

वर्ष 2000 में भारत और जापान के बीच ग्लोबल पार्टनरशिप स्थापित किया गया । वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और साझेपन के साथ कार्य करने की इस भारतीय जापानी कार्य संस्कृति की शुरुआत भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और जापानी प्रधानमंत्री योशिरो मोरी ने किया था। वर्ष 2006 में दोनों देशों के संबंधों को एक कदम आगे ले जाते हुए ” वैश्विक और सामरिक साझेदारी ” में बदल दिया गया । 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि उनके बीच “विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी ” केंद्रित संबंध रहे । 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा एक्ट ईस्ट पॉलिसी की शुरुआत की गई जिसका उद्देश्य एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति , स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना था । इस पॉलिसी में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ सहयोग के अलावा एशिया पैसिफिक के अन्य देशों के साथ सहयोग , समन्वय पर बल दिया गया । इस पॉलिसी के एक अपरिहार्य हिस्से के रूप में भारत ने जापान की पहचान की और यही कारण है कि वर्ष 2015 में दोनों देशों ने “जापान भारत विजन 2025 विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी ” की घोषणा की जिसका मुख्य उद्देश्य हिन्द प्रशांत क्षेत्र और विश्व में शांति और समृद्धि के लिए काम करना है । 2016 में जापानी प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत जापान संबंध का नया युग शुरू हो चुका है । आपसी संबंधों को मजबूती देने के इन क्रमिक प्रयासों के पिछे दोनों देशों के साझे और व्यक्तिगत हित दोनों ही छिपे हुए हैं । इसमें सबसे बड़ा कारण एशिया को एक ध्रुवीय अर्थव्यवस्था की चाह रखने वाले चीन को प्रतिसंतुलित करने की जरूरत है।

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